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विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की मांग
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कहा- सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर केंद्र से संशोधन वापस लेने का आग्रह करें
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ओडिशा के खनिज राजस्व और संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा उठाया
भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा में एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर सियासी टकराव तेज होता दिख रहा है। नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को एक बार फिर पत्र लिखकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और केंद्र सरकार से खनिज एवं खनिज विकास एवं विनियमन (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2026 को वापस लेने की मांग वाला सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कराने का आग्रह किया है। 20 सितंबर को लिखे दो पन्नों के पत्र में पटनायक ने इसे ओडिशा के खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार और संभावित राजस्व से जोड़ते हुए सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।
नवीन पटनायक ने पत्र में दावा किया है कि संशोधन से ओडिशा के खनिज संसाधनों पर कर लगाने के संवैधानिक अधिकार पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ओडिशा के भाजपा के 20 सांसदों ने संशोधन के पक्ष में मतदान किया। पटनायक के अनुसार, यह संशोधन खनन कंपनियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के अनुरूप है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी किया उल्लेख
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में खनिज अधिकारों और खनिजयुक्त भूमि पर कराधान को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2024 के फैसले का उल्लेख किया है। ‘मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया’ मामले में नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा था कि रॉयल्टी कर नहीं है और राज्यों को खनिज अधिकारों तथा खनिजयुक्त भूमि पर कर लगाने की शक्ति प्राप्त है।
पटनायक ने कहा कि इस फैसले के बाद ओडिशा के लिए पुराने बकाये की वसूली का रास्ता खुला था और उनके अनुसार राज्य को सालाना करीब 12 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना थी। उन्होंने इस राशि को राज्य के विकास और युवाओं के भविष्य से जोड़ा है।
इसके बाद संसद से पारित 2026 के संशोधन का उल्लेख करते हुए पटनायक ने कहा कि नए धारा 9डी के तहत राज्य सरकारों को खनिज अधिकारों या खनिजयुक्त भूमि पर मात्रा, मूल्य, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर कर, उपकर अथवा समान शुल्क लगाने से रोका गया है, सिवाय उन परिस्थितियों के जिन्हें केंद्र सरकार निर्धारित करे। उन्होंने दावा किया कि इससे ओडिशा को वित्तीय नुकसान और उसके संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है।
‘सर्वसम्मत प्रस्ताव से ओडिशा के हित की रक्षा हो’
नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से आग्रह किया कि नेता सदन के रूप में वे विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं और एमएमडीआर संशोधन अधिनियम को वापस लेने की मांग वाला सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कराएं। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले में राज्य के अधिकारों की पुष्टि और ओडिशा के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने पत्र में कहा कि ओडिशा के अधिकारों और युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर बीजद सरकार के साथ खड़ा रहेगा तथा सभी दलों को मिलकर राज्य के हित में प्रस्ताव पारित करना चाहिए।
यह मांग नवीन पटनायक पहले भी उठा चुके हैं। 14 अगस्त को संसद में विधेयक पारित होने के बाद उन्होंने सर्वदलीय बैठक और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी। राज्य सरकार ने अलग से विशेष बैठक बुलाने के बजाय इस मुद्दे को नियमित विधानसभा सत्र में उठाए जाने की बात कही थी। इसके बाद बीजद ने कानून वापस नहीं लिए जाने पर आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी दी थी, जबकि भाजपा ने बीजद पर ‘भ्रामक नैरेटिव’ फैलाने का आरोप लगाया था।
केंद्र का तर्क-खनन राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी बनी रहेगी
दूसरी ओर, केंद्र सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया है कि राज्यों को खनन से रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) से मिलने वाली राशि और जीएसटी में हिस्सेदारी सहित विभिन्न माध्यमों से राजस्व मिलता रहेगा। केंद्र की ओर से यह भी कहा गया है कि अलग-अलग राज्य करों के कारण खनन की लागत बढ़ती है और निवेश प्रभावित होता है। एक समान व्यवस्था से खनन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने तथा लंबे समय में राज्यों के राजस्व में वृद्धि की संभावना जताई गई है।
ओडिशा भाजपा के नेताओं ने भी बीजद के करीब 12 हजार करोड़ रुपये के संभावित नुकसान के दावे पर सवाल उठाया है। इस मुद्दे को लेकर खनिज संपदा वाले अन्य राज्यों में भी कानून के संवैधानिक प्रावधानों को चुनौती देने की चर्चा चल रही है।
अब ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र में यह मुद्दा महत्वपूर्ण राजनीतिक बहस का केंद्र बनने की संभावना है। नवीन पटनायक के नए पत्र के बाद नजर इस बात पर रहेगी कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और सत्तारूढ़ भाजपा इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ सदन में सर्वसम्मति बन पाती है।
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