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एमएमडीआर, महानदी और पाठ्यपुस्तक त्रुटियों पर सरकार को घेरने की तैयारी
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सर्वदलीय बैठक में स्पीकर सुरमा पाढ़ी ने मांगा सदन चलाने में सहयोग
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सरकार ने कहा-जनहित के हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार
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3 अक्टूबर तक चलेगा विधानसभा का मानसून सत्र
भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा के 22 सितंबर से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले सोमवार को विधानसभा परिसर में अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, संसदीय कार्य मंत्री डॉ मुकेश महालिंग, विपक्ष के उपनेता प्रसन्न आचार्य, विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक, कांग्रेस विधायक अशोक दास सहित विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
बैठक में जहां अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को सुचारू और अनुशासित ढंग से चलाने के लिए सभी दलों से सहयोग मांगा, वहीं विपक्ष ने साफ संकेत दिए कि मानसून सत्र में एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, महानदी जल विवाद, पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा।
छह विधेयक होंगे पेश
सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री डॉ मुकेश महालिंग ने कहा कि सरकार सदन में उठाए जाने वाले जनहित के सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष एमएमडीआर अधिनियम या राज्यहित से जुड़े किसी भी विषय को उठाता है तो सरकार उस पर चर्चा करेगी और सदन की कार्यवाही अध्यक्ष के निर्णय के अनुसार चलेगी। सरकार की ओर से छह विधेयकों को सत्र के दौरान पेश किए जाने की तैयारी है।
जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा को तैयार – सीएम
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि विधानसभा जनता की आशाओं, आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक विश्वास का प्रमुख मंच है। उन्होंने स्वस्थ संसदीय परंपराओं का सम्मान करते हुए जनहित से जुड़े विषयों पर रचनात्मक चर्चा और सार्थक बहस सुनिश्चित करने के लिए सभी दलों के सकारात्मक सहयोग की आवश्यकता जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ओडिशा के समग्र कल्याण और समृद्ध एवं ‘विकसित ओडिशा’ के निर्माण के लिए सभी के सहयोग और सहमति के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
एमएमडीआर पर विशेष चर्चा की मांग
हालांकि विपक्ष ने सरकार के इन आश्वासनों के बीच अपने तेवर स्पष्ट कर दिए हैं। बीजद की विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक ने एमएमडीआर अधिनियम में संशोधन से ओडिशा को होने वाले संभावित नुकसान और राजस्व संबंधी प्रभावों पर सदन में विशेष चर्चा की मांग की है। उन्होंने कहा कि बीजद इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएगा और सदन में इसे किस तरह लिया जाता है, उसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों को उठाएगी कांग्रेस
कांग्रेस विधायक अशोक दास ने भी एमएमडीआर संशोधन के साथ स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में सामने आई कथित त्रुटियों का मुद्दा उठाने की बात कही है। कांग्रेस का कहना है कि इन विषयों पर विधानसभा में पर्याप्त समय देकर चर्चा होनी चाहिए। विपक्षी दल कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में हैं।
महानदी जल विवाद भी बनेगा बड़ा मुद्दा
मानसून सत्र में छत्तीसगढ़ के साथ लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को लेकर भी राजनीतिक टकराव के आसार हैं। विपक्ष इस मुद्दे को राज्य के जल अधिकारों और ओडिशा के हितों से जोड़कर सरकार से अपनी नीति और अब तक की कार्रवाई पर जवाब मांग सकता है। इसके अलावा विपक्षी दल एमएमडीआर संशोधन के संभावित वित्तीय प्रभाव, खनन से जुड़े राज्य के हित और पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों को भी सदन के भीतर प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं।
अधिकांश दिन सरकारी कार्य के लिए निर्धारित
विधानसभा का मानसून सत्र 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा। अधिकांश दिन सरकारी कार्य के लिए निर्धारित हैं, जबकि 26 सितंबर को निजी सदस्य कार्य के तहत विधेयक और संकल्प लिए जाने हैं। सत्र शुरू होने से पहले बीजद विधायक दल की बैठक सोमवार शाम और कांग्रेस विधायक दल की बैठक मंगलवार सुबह प्रस्तावित है, जिसमें दोनों दल अपनी सदन की रणनीति को अंतिम रूप देंगे।
विधानसभा और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
सत्र को देखते हुए विधानसभा और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा के लिए 36 प्लाटून पुलिस बल और 150 से अधिक अधिकारियों की तैनाती की गई है। ऐसे में सत्र के पहले ही दिन से सरकार और विपक्ष के बीच एमएमडीआर, महानदी, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर तीखी बहस की संभावना बनी हुई है। अध्यक्ष की अपील के बावजूद सदन में राजनीतिक टकराव कितना बढ़ता है, यह सत्र की कार्यवाही के दौरान स्पष्ट होगा।
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