भुवनेश्वर। तेरापंथ भवन, भुवनेश्वर में शुक्रवार को वाणी संयम दिवस का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम में मुख्य उपासिका डॉ. वीरबाला जी छाजेड़ एवं सहयोगी उपासिका श्रीमती शीला जी सिंघवी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के सामूहिक उच्चारण से हुआ। सहयोगी उपासिका श्रीमती शीला जी सिंघवी ने वाणी संयम के महत्व को समझाते हुए कहा कि हमें यह विवेक रखना चाहिए कि कब बोलें, कैसे बोलें, कहाँ बोलें, किससे बोलें और कितना बोलें। बोलने से पूर्व विवेक का प्रयोग करना तथा आवश्यकता होने पर मौन धारण कर मौन में भी सजग एवं अनुशासित रहना आवश्यक है।
इस अवसर पर महिला मंडल की सदस्य श्रीमती सपना बैद ने वाणी संयम एवं मौन की महत्ता पर आधारित भावपूर्ण गीतिका प्रस्तुत की।
मुख्य उपासिका डॉ. वीरबाला जी छाजेड़ ने सम्यक दर्शन, प्रेक्षाध्यान एवं ध्यान के विभिन्न आयामों को जोड़ते हुए आत्मशुद्धि और संयम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सम्यक्त्व के लक्षणों तथा सुख-शांति, समता, अनुकंपा, दया, स्थिरता, भक्ति और प्रभावना जैसे जीवन-मूल्यों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक से संबंधित प्रेरणादायी प्रसंगों के माध्यम से भी उपस्थित श्रावकों को आध्यात्मिक संदेश दिया।
कार्यक्रम में तेरापंथ समाज, भुवनेश्वर के श्रावक-श्राविकाओं की अच्छी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का समापन मंगल पाठ एवं जयघोष के साथ हुआ।
वाणी संयम दिवस के माध्यम से उपस्थित सभी सदस्यों को संयमित, विवेकपूर्ण एवं मर्यादित वाणी के प्रयोग का संकल्प लेने एवं 1 घंटे का मौन लेने के लिए प्रेरित किया गया।
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