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स्थानीय निकायों को विशेषज्ञता, तकनीक और नवाचार से जोड़कर बेहतर नागरिक सेवाओं पर जोर
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार शहरी प्रशासन को अधिक प्रभावी और नागरिक केंद्रित बनाने के लिए ‘अटल नेटवर्क फॉर नॉलेज, अर्बनाइजेशन एंड रिफॉर्म’ (अंकुर) के माध्यम से शहरी स्थानीय निकायों को विशेषज्ञों, ज्ञान संस्थानों, विकास संगठनों और नवाचार साझेदारों से जोड़ रही है। इस सहयोगात्मक मंच का उद्देश्य शहरी चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान तलाशना और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदृष्टि से प्रेरित अंकुर की शुरुआत 28 मई 2025 को की गई थी। यह मंच शहरी समस्याओं और उनके समाधान के बीच सेतु के रूप में काम कर रहा है। इसके माध्यम से शहरी स्थानीय निकायों को विशेष तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञता उपलब्ध कराने के साथ नई कार्यप्रणालियों को आजमाने, संस्थागत क्षमता बढ़ाने और सफल समाधानों को अन्य शहरों में लागू करने में मदद मिल रही है।
जरूरत के अनुसार मिलेगी विशेषज्ञता
आवास एवं शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी ने कहा कि अंकुर का उद्देश्य शहरों की जरूरतों को सही ज्ञान, विशेषज्ञता और समाधान से जोड़ना है। शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने से नागरिक सेवाओं को सरल, तेज और अधिक जवाबदेह बनाने में मदद मिलेगी।
अंकुर के तहत सरकार, ज्ञान संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों, विकास संगठनों और नवाचार से जुड़े भागीदारों को एक मंच पर लाया गया है। नगर निकायों को नगर वित्त, भूमि प्रबंधन, पर्यावरण इंजीनियरिंग और डिजिटल व्यवस्था जैसे विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे प्रत्येक शहर को अलग-अलग विशेषज्ञ तलाशने की जरूरत नहीं होगी और जरूरत के समय संबंधित विशेषज्ञता का उपयोग किया जा सकेगा।
115 शहरों में डिजिटल सेवाओं को मजबूती
अंकुर के माध्यम से डिजिटल प्रशासन, पर्यावरण प्रबंधन, नियामकीय सुधार, क्षमता निर्माण, स्वच्छता, आजीविका और नागरिक संपर्क जैसे क्षेत्रों में विभिन्न पहल को सहयोग मिल रहा है। सुजोग जैसी डिजिटल पहल के माध्यम से 115 शहरों में नगरपालिका सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है।
भुवनेश्वर में डिस्पर्स्ड सोर्सेज कार्यक्रम के तहत स्थानीय स्तर पर प्रदूषण से जुड़े 2,604 मामलों की पहचान की गई, जिनमें से 1,225 का समाधान किया जा चुका है। अक्टूबर 2026 तक 80 प्रतिशत मामलों के समाधान का लक्ष्य रखा गया है।
1,150 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण
सरकार शहरी स्थानीय निकायों को मजबूत संस्थान के रूप में विकसित करने पर भी जोर दे रही है। क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के तहत अब तक 1,150 से अधिक सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ज्ञान आधारित सुधारों के जरिए भवन निर्माण, भूमि विभाजन और भू-उपयोग से जुड़े नियमों को सरल बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे सुनियोजित शहरी विकास और भूमि के अधिक प्रभावी उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
स्वच्छता कर्मियों से लेकर युवाओं तक पर जोर
अंकुर के माध्यम से शहरी नवाचार को जन-केंद्रित बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और गरिमा बढ़ाने के लिए मशीनों, सुरक्षा उपकरणों और प्रशिक्षण की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। वहीं, लाइटहाउस कार्यक्रम के जरिए युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
सहयोग और सहयोग प्लस जैसी पहलों के माध्यम से शहरी परिवारों को सरकारी योजनाओं और आवश्यक सेवाओं से जोड़ने में भी सहायता दी जा रही है।
नए समाधानों को आजमाने का मंच
अंकुर उभरती शहरी चुनौतियों के लिए नए समाधानों को आजमाने और सफल होने पर उन्हें दूसरे नगर निकायों में लागू करने का अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। कम मूल्य वाले प्लास्टिक कचरे के पुन: उपयोग और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन सहित संसाधनों के प्रभावी उपयोग से जुड़ी पहल को भी इसके माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, अंकुर के जरिए किसी शहर की समस्या की पहचान से लेकर विशेषज्ञता से उसका समाधान तैयार करने, जमीन पर उसका परीक्षण करने और सफल होने पर उसे अन्य शहरों में लागू करने तक की व्यवस्था विकसित की जा रही है। ‘विकसित ओडिशा एट 2036’ के लक्ष्य के अनुरूप यह पहल राज्य में स्वच्छ, सुरक्षित, सक्षम, लचीले और नागरिक केंद्रित शहरों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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