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पुरी, वड़ा और बोंडा जैसे अधिक तेल वाले नाश्ते से बचने का निर्देश
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स्थानीय पारंपरिक तेलों को बढ़ावा देने की अपील
भुवनेश्वर, ईंधन की मांग में कमी लाने के उद्देश्य से ओडिशा के उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी एवं गैर-सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों को छात्रावासों में विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करते समय खाना पकाने के तेल के उपयोग को कम करने का निर्देश दिया है।
उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में सभी संबंधित महाविद्यालयों के छात्रावास कैंटीनों में भोजन तैयार करने के दौरान तेल की खपत कम करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि तेल की खपत कम करते समय विद्यार्थियों के भोजन के पोषण स्तर से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
विभाग ने छात्रावासों के नाश्ते के मेन्यू में अधिक तेल वाले खाद्य पदार्थों को कम करने की सलाह दी है। विशेष रूप से पूरी, वड़ा और बोंडा जैसे डीप-फ्राइड खाद्य पदार्थों को नाश्ते में शामिल करने से बचने का निर्देश दिया गया है।
पत्र में भोजन तैयार करते समय डीप-फ्राइंग को कम करने और पोषण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। साथ ही, आयातित पाम, सूरजमुखी और सोयाबीन तेल की तुलना में पारंपरिक घी, सरसों तेल और मूंगफली तेल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की अपील की गई है।
उच्च शिक्षा विभाग ने महाविद्यालयों के एनएसएस (NSS) और यूथ रेड क्रॉस (YRC) स्वयंसेवकों को भी इस पहल से जोड़ने का निर्देश दिया है। स्वयंसेवकों के माध्यम से समुदाय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर घरों में दैनिक खाना पकाने के दौरान तेल की खपत कम करने के प्रति लोगों को जागरूक करने को कहा गया है।
विभाग ने महाविद्यालयों से इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करते समय तेल की खपत को तर्कसंगत स्तर पर रखने का आग्रह किया है।
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