भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों की निगरानी और लोगों को समय पर आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को चार जिलों में तैनात किया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बालेश्वर, भद्रक, क्योंझर और जाजपुर जिलों में तैनात किए गए अधिकारी शनिवार सुबह अपने-अपने जिलों के लिए रवाना हुए और उन्होंने जमीनी स्तर पर बाढ़ के बाद की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। ये अधिकारी जिला प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समन्वय कर स्थिति का आकलन करेंगे तथा आवश्यक कदम उठाएंगे।
विभाग द्वारा तैनात वरिष्ठ अधिकारियों में सरकार के विशेष सचिव डॉ. विजय मिश्रा को बालेश्वर, जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. रवींद्र मिश्रा को भद्रक, परिवार कल्याण निदेशक डॉ. राजेंद्र पाणिग्रही को क्योंझर और स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. एम.एम. पांडा को जाजपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा कि लंबे समय तक बाढ़ की स्थिति रहने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी तरह की महामारी या बीमारी के प्रकोप को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग व्यापक एहतियाती कदम उठा रहा है। लंबे समय तक जलमग्न रहे गांवों में स्वच्छता और कीटाणुशोधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद जलमग्न रहे गांवों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की व्यापक स्तर पर सफाई और कीटाणुशोधन किया जाएगा।
बाढ़ के बाद जलजनित और अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता, आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार बनाए रखना तथा प्रभावित लोगों को निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी उभरती समस्या पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा, पेयजल स्रोतों की सफाई और कीटाणुशोधन तथा बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों मंे पड़े सड़े-गले खाद्य पदार्थों, मृत पशुओं और अन्य जैविक कचरे को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार ने कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य निगरानी की जाएगी, ताकि संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान कर उनका प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों की क्षेत्र में मौजूदगी और निगरानी से बाढ़ प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता और समन्वय को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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