भुवनेश्वर, श्रमिकों के सम्मान, अधिकार, रोजगार सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की ओर से सोमवार, 17 अगस्त को देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान देश के 28 राज्यों और बीएमएस से जुड़े 42 महासंघों के सदस्य विभिन्न जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन, रैली और धरना देंगे। इसके साथ ही जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री और श्रम मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
बीएमएस ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष बादल महाराणा ने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति में श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन आज श्रमिक वर्ग विभिन्न समस्याओं और असुरक्षा का सामना कर रहा है। आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और कार्यक्षेत्र में बदलती परिस्थितियों ने श्रमिक परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है।
रांची में आयोजित बीएमएस की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार यह देशव्यापी आंदोलन किया जा रहा है। संगठन ने सरकारी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में असंगठित और संविदा आधारित रोजगार के बढ़ते चलन पर चिंता जताई है। बीएमएस ने संविदा श्रमिकों को रोजगार सुरक्षा देने तथा समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करने की मांग की है।
बीएमएस ने आंगनबाड़ी, आशा, मध्याह्न भोजन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) सहित विभिन्न योजनाओं में कार्यरत स्कीम वर्करों को श्रमिक का दर्जा देने, उन्हें सम्मानजनक वेतन उपलब्ध कराने तथा नए श्रम कानूनों के दायरे में शामिल करने की मांग की है।
संगठन ने ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रतिमाह करने और इसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग की है। इसके अलावा जरूरतमंद श्रमिकों को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाने तथा सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को पुनः लागू करने की मांग भी उठाई गई है।
बीएमएस ने देश में न्यूनतम मासिक मजदूरी 30,000 रुपये निर्धारित करने, ईएसआई और ईपीएफ की पात्रता सीमा बढ़ाने तथा बोनस और ग्रेच्युटी व्यवस्था में सुधार की मांग की है। संगठन ने सभी संविदा श्रमिकों को रोजगार सुरक्षा देने और उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।
इसके साथ ही सरकारी विभागों में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को तत्काल भरने और राज्य में औद्योगिक विकास के माध्यम से योग्य स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। बीएमएस ने कहा कि राज्य के लोगों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने की स्थिति समाप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार के अवसर सृजित किए जाने चाहिए।
बीएमएस ने ‘इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड’ (IR Code) और ‘ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड’ (OSH & WC Code) की कुछ व्यवस्थाओं पर आपत्ति जताई है। संगठन ने इन विषयों पर प्रमुख ट्रेड यूनियनों के साथ व्यापक चर्चा के लिए तत्काल भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) बुलाने की मांग की है।
इसके अलावा देश के विशाल असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग भी की गई है। बीएमएस का कहना है कि श्रमिकों के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना देश का समग्र आर्थिक विकास संभव नहीं है।
बीएमएस ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष बादल महाराणा ने कहा कि श्रमिक देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। इसलिए उनके अधिकारों, सम्मान, रोजगार सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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