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जैसा आप सोचेंगे, वैसा ही राष्ट्र बनेगा’: विजय खंडेलवाल

  • कहा-‘राष्ट्र ने आपके लिए क्या किया’ से अधिक महत्वपूर्ण है कि ‘आपने राष्ट्र के लिए क्या किया’

भुवनेश्वर। “बच्चे राष्ट्र के भविष्य होते हैं। जैसा आप सोचेंगे, वैसा ही राष्ट्र बनेगा। इसलिए यह सोचना अधिक महत्वपूर्ण है कि राष्ट्र ने आपके लिए क्या किया, इसके बजाय यह विचार किया जाए कि आपने राष्ट्र के लिए क्या किया।” प्रमुख उद्योगपति एवं समाजसेवी श्री विजय खंडेलवाल ने रमादेवी महिला विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर में आयोजित ‘एक कविता राष्ट्र के नाम’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी का संदेश देते हुए यह बात कही।

विश्व हिंदी परिषद, ओडिशा प्रांत एवं रमादेवी महिला विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कविता के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, भाषा, संस्कृति और सामाजिक चेतना को मजबूत करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की काव्य प्रतिभा से लेकर भाषा और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

बच्चे राष्ट्र के भविष्य होते हैं

विजय खंडेलवाल ने अपने संबोधन में युवाओं और बच्चों को राष्ट्र की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए कहा कि आने वाले समय में देश का स्वरूप आज की पीढ़ी की सोच और कार्यों से निर्धारित होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों के मन में जिस प्रकार की सोच और संस्कार विकसित होंगे, उसी के अनुरूप समाज और राष्ट्र का निर्माण होगा।

उन्होंने युवाओं से केवल अपने अधिकारों और सुविधाओं के बारे में सोचने के बजाय राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों पर भी विचार करने का आह्वान किया। उनके अनुसार राष्ट्र निर्माण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी से ही देश आगे बढ़ सकता है।

राष्ट्र का भविष्य नागरिकों की सोच से जुड़ा हुआ है

उन्होंने कहा कि राष्ट्र का भविष्य नागरिकों की सोच से जुड़ा हुआ है। यदि युवा सकारात्मक सोच, जिम्मेदारी और राष्ट्रहित की भावना के साथ आगे बढ़ेंगे तो देश की प्रगति को नई दिशा मिलेगी।

विजय खंडेलवाल का यह संदेश विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि कार्यक्रम का उद्देश्य साहित्य और कविता के माध्यम से युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम और सामाजिक चेतना को बढ़ावा देना भी था।

‘राष्ट्र ने आपके लिए क्या किया’ नहीं, ‘आपने राष्ट्र के लिए क्या किया’ सोचें

अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल रखा। उन्होंने कहा कि नागरिकों को केवल यह नहीं सोचना चाहिए कि राष्ट्र ने उन्हें क्या दिया, बल्कि उन्हें यह विचार करना चाहिए कि वे राष्ट्र के लिए क्या योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका होती है। अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी, जिम्मेदारी और सकारात्मक योगदान के माध्यम से भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।

कविता के माध्यम से राष्ट्र चेतना का संदेश

‘एक कविता राष्ट्र के नाम’ कार्यक्रम में कविता को राष्ट्रप्रेम और सामाजिक चेतना का माध्यम बनाया गया। विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने देशभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया।

प्रतियोगिता में अद्याशा भुइयां ने प्रथम, मेघना बलियारसिंह ने द्वितीय तथा क्षीराब्धि मिश्रा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सांत्वना पुरस्कार के लिए सैना मेल्ली, सानूजी सोनालिका साहू और साई सुधा मोहंती को पुरस्कृत किया गया।

प्रतियोगिता का मूल्यांकन कवि एवं साहित्यकार श्री विक्रमादित्य सिंह, डॉ. सबाहत ताबरीज़ एवं डॉ. संघमित्रा भंज ने भावाभिव्यक्ति, काव्य-पाठ, उच्चारण, विषय-वस्तु और प्रस्तुतीकरण के आधार पर किया।

कविता राष्ट्र की चेतना जगाने का माध्यम : विक्रमादित्य सिंह

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व हिंदी परिषद, ओडिशा प्रांत के अध्यक्ष श्री विक्रमादित्य सिंह ने की। उन्होंने कहा कि कविता केवल भावों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना को जागृत करने का सशक्त माध्यम है। ‘एक कविता राष्ट्र के नाम’ जैसे आयोजन साहित्य और राष्ट्रभावना को एक साथ जोड़ते हुए युवा पीढ़ी को भाषा, संस्कृति और देश से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

‘भाषा सफलता के लिए प्रतिबंध नहीं है’ : डॉ. फनी महांति

सुविख्यात कवि एवं साहित्यकार डॉ. फनी महांति ने कहा कि भाषा सफलता के मार्ग में प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक देश में भाषा को लेकर विवाद बना रहेगा, तब तक देश का समग्र विकास संभव नहीं हो सकता।

उन्होंने भाषा को अस्मिता, पहचान और परिचय का आधार बताते हुए युवाओं को देश का भविष्य कहा तथा भाषा और साहित्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

कविता जीवन का अभिन्न हिस्सा : कुलपति

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रमादेवी महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) ज्योत्स्ना कुमारी बिस्वाल राउत ने कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानी मां रमादेवी आज के आयोजन को देखकर निश्चित रूप से गौरवान्वित हो रही होंगी।

उन्होंने कहा कि कविता जीवन का अभिन्न हिस्सा है और बचपन से ही हम कविताएं सुनते आ रहे हैं। गीत गुनगुनाने से मन को शांति मिलती है और मानसिक तनाव भी कम होता है। उन्होंने मां की ममता के विभिन्न भावों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए भावपूर्ण कविता भी प्रस्तुत की।

‘भाषा का विकास समन्वय में है’ : डॉ. स्नेहलता दास

कार्यक्रम की विशेष सूत्रधार एवं रमादेवी महिला विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. स्नेहलता दास ने दूसरे सत्र के स्वागत भाषण में कहा कि भाषा का विकास भाषाओं के समन्वय में है। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदी परिषद का उद्देश्य भी यही है। राजभाषा हिंदी क्षेत्रीय भाषाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए विश्व पटल पर स्थापित होगी।

साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी पर जागरूकता

विश्व हिंदी परिषद के उपाध्यक्ष श्री मनीष कुमार पाण्डेय ने बढ़ते साइबर अपराध एवं डिजिटल गिरफ्तारी के विषय पर ज्ञानवर्धक वक्तव्य दिया। उन्होंने लोगों को डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के बीच सतर्क रहने और साइबर अपराध से बचाव के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया।

काव्य प्रतियोगिता से शुरू हुआ आयोजन

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के बीच काव्य प्रतियोगिता आयोजित की गई। शुरुआत में श्री अविनाश दाश ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डाला। सुश्री पार्वती बारीक ने दोनों सत्रों का प्रभावी मंच संचालन किया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सहयोगियों के प्रति आयोजकों ने आभार व्यक्त किया। श्री भगवान बेहरा ने उपस्थित अतिथियों, प्रतिभागियों एवं अन्य सदस्यों के लिए जलपान की व्यवस्था में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। अंत में शैक्षणिक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष श्री आशीष विद्यार्थी ने काव्यात्मक शैली में धन्यवाद ज्ञापन किया।

‘एक कविता राष्ट्र के नाम’ ने कविता, भाषा और साहित्य को राष्ट्रचेतना से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि राष्ट्र निर्माण केवल विचारों से नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, जिम्मेदारी और सक्रिय योगदान से संभव है।

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