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ओडिशा के विभिन्न स्थानों पर ‘विशाल भारत’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन
भुवनेश्वर: ओडिशा के विभिन्न स्थानों पर गुरुवार को ‘विशाल भारत’ विषय पर संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के तत्वावधान में आयोजित इन कार्यक्रमों में भारत की सभ्यतागत, सांस्कृतिक और दार्शनिक अवधारणा तथा ‘अखंड भारत’ के विचार पर विस्तार से चर्चा हुई।
राजधानी भुवनेश्वर में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन उत्कल विश्वविद्यालय परिसर में सुबह किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, पुरी के कुलपति एवं केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व परिसर निदेशक प्रोफेसर प्रभात कुमार महापात्र शामिल हुए। उन्होंने योगी श्री अरविंद की अखंड भारत की परिकल्पना पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रोफेसर महापात्र ने कहा कि वैदिक काल से ही भारत सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से एक विशिष्ट इकाई रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को केवल राजनीतिक और भौगोलिक सीमाओं तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, इसी दृष्टिकोण की गलतफहमी के कारण स्वतंत्रता के समय तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व भारत विभाजन और पाकिस्तान के गठन के प्रस्ताव पर सहमत हुआ।
दोपहर में ओडिया विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्य नारायण आचार्य मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई आयाम हैं।
उन्होंने कहा कि आम लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं तथा पड़ोसी और शत्रु देशों से उत्पन्न संभावित चुनौतियों के बारे में जागरूक होना आवश्यक है। उन्होंने सूचना युद्ध, छद्म युद्ध और साइबर युद्ध को आधुनिक दौर की गंभीर सुरक्षा चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया।
प्रोफेसर आचार्य ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच जैसे संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने संस्कृत साहित्य के अध्ययन के माध्यम से भारत की व्यापक सभ्यतागत अवधारणा को समझने का आह्वान किया।
दोनों कार्यक्रमों में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के पूर्व राष्ट्रीय संगठन मंत्री गोलोक बिहारी राय ने वैश्विक स्तर पर जारी संघर्षों और अस्थिरता के विभिन्न कारणों पर चर्चा की। उन्होंने ईरान, फिलिस्तीन और यूक्रेन सहित विभिन्न क्षेत्रों में जारी अशांति का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व नेतृत्व की स्वार्थपूर्ण प्रवृत्ति और भौतिक सुख की बढ़ती लालसा ने दुनिया को संघर्ष की ओर धकेला है।
राय ने कहा कि भारत ने हमेशा भौतिक विकास की तुलना में आध्यात्मिक उन्नति को अधिक महत्व दिया है और कभी विस्तारवादी मानसिकता को प्रोत्साहन नहीं दिया। उन्होंने कहा कि “विशाल और शक्तिशाली भारत ही विश्व का नेतृत्व कर सकता है।” उनके अनुसार, भारत के नेतृत्व में विश्व शांति और आध्यात्मिकता के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा, “भारत केवल एक भौगोलिक भूखंड नहीं, बल्कि एक दार्शनिक अवधारणा है।”
भुवनेश्वर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर श्रीरूप गोस्वामी ने कहा कि विकसित ओडिशा ही विकसित भारत की आधारशिला बनेगा। उन्होंने लोगों से उत्कलमणि गोपबंधु दास के राजनीतिक आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
सत्यबादी कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच श्रीक्षेत्र पुरी शाखा के अध्यक्ष तथा ओडिया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर शत्रुघ्न पाणिग्राही ने की। उन्होंने स्वामी विवेकानंद, योगी अरविंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भारत की परिकल्पना पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच भुवनेश्वर शाखा के अध्यक्ष डॉ. हिमांशु शेखर राउत ने हिंदू अर्थव्यवस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर चर्चा की। वहीं सम्मानित वक्ता डॉ. युधिष्ठिर साहू ने कहा कि योगी अरविंद की अखंड भारत की परिकल्पना को समझे बिना ‘विशाल भारत’ की व्यापक अवधारणा को समझना संभव नहीं है।
उन्होंने भारत को केवल मिट्टी और पत्थरों से बना भूभाग न बताते हुए इसे एक जीवंत संस्कृति और निरंतर प्रवाहित परंपरा बताया।
प्रख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर अनंत नारायण जेना ने विकास के बहुआयामी पहलुओं पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में सचिव डॉ. चिन्मय रंजन कुमार, डॉ. युधिष्ठिर साहू, देवप्रिय परिडा सहित सौ से अधिक बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया तथा विभिन्न विषयों पर आयोजित परिचर्चा में अपने विचार साझा किए।
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