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ओडिशा में तीन दिनों में 10 लोगों की मौत के बाद सरकार की पहल
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पांच जिलों में पहले चरण में स्थापित होंगे स्वचालित चेतावनी उपकरण
भुवनेश्वर। ओडिशा में आकाशीय बिजली गिरने से लगातार हो रही मौतों को रोकने के लिए राज्य सरकार सायरन आधारित अत्याधुनिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करने जा रही है। पिछले तीन दिनों में ही आकाशीय बिजली गिरने से 10 लोगों की मौत होने के बाद सरकार ने इस दिशा में तेजी से कदम उठाया है। नई प्रणाली के तहत बिजली गिरने, गरज-चमक, तेज बारिश और तेज हवाओं से पहले लोगों को स्वचालित सायरन के माध्यम से चेतावनी दी जाएगी, जिससे वे समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकेंगे।
सबसे अधिक किसान बने आकाशीय बिजली का शिकार
हाल के तीन दिनों में जिन 10 लोगों की मौत हुई, उनमें अधिकांश 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के किसान थे, जो गरज-चमक के दौरान खेतों में कृषि कार्य कर रहे थे। मृतकों में सात किसान धान की रोपाई में लगे हुए थे।
इसके अलावा एक मवेशी चराने वाला व्यक्ति, मोबाइल फोन का उपयोग कर रहा एक व्यक्ति तथा स्कूल परिसर में पेड़ के नीचे बैठे एक शारीरिक शिक्षा शिक्षक की भी आकाशीय बिजली गिरने से जान चली गई।
चेतावनी के बावजूद नहीं रुक रहीं मौतें
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा समय-समय पर मौसम संबंधी अग्रिम चेतावनी जारी की जाती है। वहीं ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ओएसडीएमए) भी लगातार जनजागरूकता अभियान चला रहा है। इसके बावजूद आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों में कमी नहीं आ रही है।
अधिकारियों के अनुसार, दूर-दराज के कृषि क्षेत्रों में काम कर रहे कई किसानों तक मोबाइल अलर्ट समय पर नहीं पहुंच पाते या फिर वे उन्हें गंभीरता से नहीं लेते, जिसके कारण हादसे हो जाते हैं।
पांच जिलों में लगेगा सायरन
आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों को कम करने के लिए राज्य सरकार इलेक्ट्रिक फील्ड मीटर आधारित स्वचालित सायरन प्रणाली स्थापित करेगी। यह प्रणाली राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और आईएमडी के सहयोग से विकसित की गई है।
पहले चरण में इसे आकाशीय बिजली से सर्वाधिक प्रभावित मयूरभंज, बालेश्वर, गंजाम, केंदुझर और कटक जिलों में स्थापित किया जाएगा।
1.5 से 5 किलोमीटर तक मिलेगी समय पर चेतावनी
नई प्रणाली के तहत किसी क्षेत्र में आकाशीय बिजली, गरज-चमक, तेज वर्षा या तेज हवा की संभावना होने पर 1.5 से 5 किलोमीटर के दायरे में स्वचालित सायरन बज जाएगा।
इससे खेतों में काम कर रहे किसान, मवेशी चराने वाले लोग और खुले स्थानों पर मौजूद अन्य लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकेंगे और जनहानि की आशंका काफी हद तक कम होगी।
दोपहर से शाम तक सबसे अधिक रहता है खतरा
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, ओडिशा में प्री-मानसून और मानसून के दौरान, विशेषकर मई, जुलाई और अगस्त में आकाशीय बिजली की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे के बीच, खासकर अत्यधिक गर्मी और उमस के दौरान इसका खतरा बढ़ जाता है।
खेती से जुड़े कार्य सुबह के समय पूरा करें
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेती से जुड़े कार्य सुबह के समय पूरा करने का प्रयास करें और गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे तथा जलाशयों के आसपास जाने से बचें। उनका कहना है कि समय पर चेतावनी और जागरूकता ही आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।
सरकारी आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 और 2024-25 के दौरान ओडिशा में आकाशीय बिजली गिरने से लगभग 600 लोगों की मौत हुई। वहीं 2019-20 से 2023-24 के बीच कुल 1,625 लोगों ने इस प्राकृतिक आपदा में अपनी जान गंवाई।
इनमें मयूरभंज जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां इस अवधि में 119 लोगों की मौत दर्ज की गई। लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने मजबूत चेतावनी प्रणाली और व्यापक जनजागरूकता अभियान को समय की आवश्यकता बताया है।
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