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3000 करोड़ के चिटफंड घोटाले में आंध्र के पूर्व विधायक के ठिकानों पर छापे

  •     2021 में ओडिशा ईओडब्ल्यू ने किया था गिरफ्तार

  •     मनी लॉन्ड्रिंग और करीब 3,000 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज

  •     भुवनेश्वर की ईडी की टीम ने विजय प्रसाद के परिसरों की तलाशी ली

भुवनेश्वर/विशाखापट्टनम। ओडिशा के बहुचर्चित चिटफंड मामले से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के पूर्व विधायक मल्ला विजय प्रसाद से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। वर्ष 2021 में ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने इसी मामले में विजय प्रसाद को गिरफ्तार किया था।

सूत्रों के अनुसार, भुवनेश्वर स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने विजय प्रसाद के आवास, कार्यालय तथा उनकी कंपनी वेलफेयर ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े परिसरों की तलाशी ली। जांच के दौरान बैंक खातों, वित्तीय दस्तावेजों, संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड, लैपटॉप, डिजिटल उपकरणों और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की गई।

ईडी को संदेह है कि वेलफेयर ग्रुप ऑफ कंपनीज के अध्यक्ष रहते हुए विजय प्रसाद ने आम लोगों से जमा की गई धनराशि में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं कीं और धन का कथित रूप से दुरुपयोग किया। जांच एजेंसी करीब 3,000 करोड़ रुपये की कथित चिटफंड अनियमितताओं और उससे जुड़े मनी ट्रेल की पड़ताल कर रही है।

ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के हजारों निवेशक शिकार

रिपोर्टों के मुताबिक, विजय प्रसाद की कंपनी वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड पर ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के हजारों निवेशकों से करीब 1,200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। इस संबंध में ओडिशा पुलिस ने वर्ष 2019 में मामला दर्ज किया था।

विशाखापट्टनम पश्चिम सीट से थे विधायक

मल्ला विजय प्रसाद वर्ष 2009 में विधायक चुने गए थे और 2019 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के उम्मीदवार के रूप में विशाखापट्टनम पश्चिम सीट से चुनाव लड़ा था। वर्ष 2021 में उन्हें आंध्र प्रदेश एजुकेशन वेलफेयर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन का अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था। वर्तमान में वह वाईएसआरसीपी के विशाखापट्टनम पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के समन्वयक हैं।

ओडिशा उच्च न्यायालय से मिली थी सशर्त जमानत

गौरतलब है कि ओडिशा अपराध शाखा की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने वर्ष 2021 में चिटफंड घोटाले के आरोप में विजय प्रसाद को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें ओडिशा उच्च न्यायालय से सशर्त जमानत मिल गई थी।

इससे पहले वर्ष 2016 में भी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सैकड़ों करोड़ रुपये के कथित चिटफंड घोटाले की जांच के सिलसिले में विजय प्रसाद के कार्यालय और आवास पर छापेमारी की थी।

अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क की तलाश

हालांकि, ईडी ने अभी तक छापेमारी के परिणामों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। एजेंसी जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले में कथित अपराध से अर्जित धन और वित्तीय अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

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