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राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक एवं रथयात्रा के प्रख्यात हिन्दी कमेंटेटर का हुआ सम्मान
भुवनेश्वर। गुरु केवल ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, संस्कार और जीवन को सही दिशा देने वाले सच्चे पथप्रदर्शक होते हैं। आज के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने से पहले शिक्षकों का स्वयं चरित्रवान, प्रतिभावान और आदर्श व्यक्तित्व होना आवश्यक है। यह बात राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात हिन्दी शिक्षक एवं भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा के वरिष्ठ हिन्दी कमेंटेटर अशोक पाण्डेय ने अनुज हिन्दी पुस्तकालय में आयोजित समारोह में कही।
गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ किशन खण्डेलवाल के संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि अनुज हिन्दी पुस्तकालय के लिए यह गौरव की बात है कि अशोक पाण्डेय जैसे विद्वान शिक्षक और साहित्यकार इससे जुड़े हैं। उन्होंने केन्द्रीय विद्यालय संगठन में हिन्दी शिक्षक और प्राचार्य के रूप में लंबे समय तक सेवाएं दीं तथा वर्ष 2006 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हुए। उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक आकाशवाणी और दूरदर्शन से भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा की हिन्दी कमेंट्री कर जगन्नाथ संस्कृति के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
सम्मान ग्रहण करने के बाद अशोक पाण्डेय ने कहा कि गुरु का आचरण ही विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा होता है और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए शिक्षकों को स्वयं आदर्श बनना चाहिए।
समारोह में पुस्तकालय के मुख्य संरक्षक सुभाष चन्द्र भुरा, किशन खण्डेलवाल, रामकिशोर शर्मा, बनवारीलाल लढानिया सहित लगभग 40 कवियों ने पाण्डेय का सम्मान किया। इस अवसर पर कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं का सस्वर पाठ कर गुरुपूर्णिमा समारोह को साहित्यिक और भावपूर्ण बना दिया।
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