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जाजपुर में सात स्थानों पर तटबंध टूटे
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एक लाख से अधिक लोग प्रभावित
भुवनेश्वर। ओडिशा में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई है। कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि विभिन्न जिलों में तटबंध टूटने और जलस्तर बढ़ने से 250 से अधिक गांवों का संपर्क कट गया है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है।
सबसे अधिक प्रभावित जाजपुर जिले में तीन नदियों पर कुल सात स्थानों पर तटबंध टूटने की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें ब्राह्मणी नदी पर चार, बैतरणी की सहायक कानी नदी पर दो तथा खरस्रोता की नुआ महारा शाखा पर एक तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ है। इसके कारण करीब 250 गांव जलमग्न हो गए हैं। एक लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि 10 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।
भद्रक जिले में सालंदी नदी का जलस्तर राजघाट में 18.50 फीट दर्ज किया गया, जो 17.00 फीट के खतरे के निशान से काफी ऊपर है। इससे भद्रक, चांदबाली, टिहिड़ी और धामनगर प्रखंडों के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। वहीं कंसाबांसा और गेमई नदियों के उफान से बसुदेवपुर क्षेत्र की सात पंचायतें प्रभावित हुई हैं।
पुरी जिले में देवी और भार्गवी नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बालंगा में भार्गवी नदी का जलस्तर 11.25 फीट दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 10.42 फीट है। वहीं बउरीआकाना में देवी नदी 5.08 फीट पर पहुंच गई, जो 4.95 फीट के खतरे के निशान से अधिक है।
पारादीप के कुजंग प्रखंड में पांच गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है, जबकि दासपल्ला के गनिया प्रखंड में 30 गांव चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। आठगढ़ क्षेत्र में बाढ़ का पानी अंसुपा झील में प्रवेश कर गया है, जिससे तिगिरिया और बांकी प्रखंड प्रभावित हुए हैं। वहीं बालेश्वर के रेमुणा प्रखंड में कई घरों और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
उधर, महानदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मुंडली बैराज से जलप्रवाह 8.73 लाख क्यूसेक प्रति सेकंड तक पहुंच गया है, जो खतरे के स्तर के बेहद करीब है। इसे देखते हुए प्रशासन ने खुर्दा, जगतसिंहपुर, केंद्रापड़ा और पुरी सहित महानदी के निचले तटीय जिलों में विशेष सतर्कता बरतने और सभी राहत एजेंसियों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
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