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कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बना प्रेमाश्रय

  •  त्याग और सेवा से खड़ा हुआ मानवता का अनूठा केंद्र

  •  भुवनेश्वर में 10 हजार वर्गफुट में बना 28 कमरों वाला निःशुल्क सेवा केंद्र

  •  60 मरीजों और उनके परिजनों के रहने-खाने की निःशुल्क व्यवस्था

  •  उत्कल प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन ने सराहा सेवा का यह मिशन

भुवनेश्वर। जहां एक ओर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज उपचार के साथ रहने और भोजन की चिंता से परेशान रहते हैं, वहीं ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में मानवता, सेवा और त्याग का एक प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया है। उत्कल प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन, भुवनेश्वर के सम्मानित सदस्य सत्यनारायण अग्रवाल और विनोद अग्रवाल ने कैंसर पीड़ितों की निस्वार्थ सेवा के उद्देश्य से ‘प्रेमाश्रय’ की स्थापना कर समाज के सामने सेवा की नई मिसाल पेश की है।
करीब 10 हजार वर्गफुट क्षेत्र में विकसित इस सेवा केंद्र में 28 कमरे, एक विशाल हॉल, रसोईघर और खुला परिसर बनाया गया है। यहां एक समय में लगभग 60 मरीजों और उनके परिजनों के रहने एवं भोजन की पूरी तरह निःशुल्क व्यवस्था उपलब्ध है। दूर-दराज के क्षेत्रों से उपचार के लिए आने वाले कैंसर मरीजों के लिए यह केंद्र किसी संजीवनी से कम नहीं है।
अपनी पीड़ा को बनाया समाज सेवा का संकल्प
सत्यनारायण अग्रवाल ने अपनी लगभग 4,000 वर्गफुट भूमि इस सेवा कार्य के लिए समर्पित की, जबकि विनोद अग्रवाल ने वास्तु सिद्धांतों के अनुरूप भवन का निर्माण कराया। दोनों स्वयं किसी न किसी रूप में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जुड़ी मानसिक पीड़ा से गुजर चुके थे। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत वेदना को समाज सेवा का संकल्प बनाया और कैंसर मरीजों के लिए एक स्थायी आश्रय तैयार करने का निर्णय लिया।
शुरुआत में दोनों ने एम्स भुवनेश्वर के निकट किराये के मकान में मरीजों के लिए आश्रय की व्यवस्था की थी, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान आई कठिनाइयों को देखते हुए स्थायी भवन के रूप में ‘प्रेमाश्रय’ का निर्माण कराया गया।
चार प्रमुख अस्पतालों से जुड़ी सेवा
प्रेमाश्रय ने एम्स भुवनेश्वर, सम अस्पताल, आचार्य हरिहर क्षेत्रीय कैंसर केंद्र तथा एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अपने प्रशिक्षित सहयोगियों की व्यवस्था की है। ये मरीजों का मार्गदर्शन करते हैं और आवश्यकता होने पर उन्हें प्रेमाश्रय तक पहुंचाने में सहायता करते हैं। कई मरीज उपचार की अवधि के दौरान चार-पांच महीने तक यहां रहकर सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए भी अलग से विशेष व्यवस्था की गई है।
हर माह लगभग छह लाख रुपये का खर्च
प्रेमाश्रय के संचालन पर प्रतिमाह लगभग 6 लाख का खर्च आता है। यह पूरी राशि अभी तक सत्यनारायण अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, उनके परिवारजनों और मित्रों के सहयोग से वहन की जा रही है। यहां मरीजों को निःशुल्क आवास, भोजन और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।
मारवाड़ी समाज की सेवा परंपरा का जीवंत उदाहरण
हाल ही में उत्कल प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन, भुवनेश्वर के पदाधिकारियों ने प्रेमाश्रय का दौरा किया। उन्होंने मरीजों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना, फल वितरित किए तथा यहां की स्वच्छता, भोजन और रहने की उत्कृष्ट व्यवस्था की सराहना की। पदाधिकारियों ने कहा कि प्रेमाश्रय यह साबित करता है कि मानवता और सेवा की भावना आज भी समाज में जीवित है।
समाज से सहयोग की अपील
ओडिशा आज पूर्वी भारत का एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र बन चुका है, जहां अनेक राज्यों से मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में प्रेमाश्रय जैसे सेवा केंद्रों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। संस्थापकों ने समाज के सभी वर्गों से इस सेवा अभियान को आगे बढ़ाने में सहयोग की अपील की है।
उन्होंने कहा कि “अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, बूंद-बूंद से घड़ा भरता है।” कोई भी व्यक्ति अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार 1 रुपये से लेकर किसी भी राशि तक सहयोग कर सकता है। जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या अन्य विशेष अवसरों पर मरीजों के लिए एक दिन के भोजन का प्रायोजन भी किया जा सकता है।
प्रेमाश्रय केवल एक भवन नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और मानवता का ऐसा केंद्र है, जो कैंसर पीड़ितों और उनके परिवारों को कठिन समय में आश्रय, सम्मान और आत्मीयता प्रदान कर रहा है।

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