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जिंदगी फाउंडेशन के 20 विद्यार्थियों ने नीट-2026 में पाई सफलता
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अब तक 163 विद्यार्थियों का मेडिकल कॉलेज तक का सफर हुआ तय
भुवनेश्वर। सही मार्गदर्शन, कड़ी मेहनत और अटूट हौसले ने आर्थिक अभावों से जूझ रहे 20 युवाओं की तकदीर बदल दी। भुवनेश्वर स्थित जिंदगी फाउंडेशन की निःशुल्क नीट कोचिंग और मार्गदर्शन के दम पर इन विद्यार्थियों ने नीट-2026 में सफलता हासिल कर यह साबित किया कि प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। गरीबी, पारिवारिक संघर्ष और सामाजिक चुनौतियों को पीछे छोड़ इन छात्रों ने डॉक्टर बनने की दिशा में पहला कदम बढ़ाते हुए हजारों युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
आर्थिक तंगी, पारिवारिक संघर्ष और सामाजिक चुनौतियों के बीच भुवनेश्वर स्थित जिंदगी फाउंडेशन के 20 विद्यार्थियों ने नीट-2026 में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प, सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
इन विद्यार्थियों की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं।
वर्ष 2017 से कार्यरत जिंदगी फाउंडेशन आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवारों के विद्यार्थियों को निःशुल्क नीट कोचिंग, अध्ययन सामग्री, भोजन और आवास उपलब्ध कराता है। इस वर्ष की सफलता के साथ अब तक संस्था के 163 विद्यार्थी मेडिकल शिक्षा की राह पर आगे बढ़ चुके हैं।
इस बार सफल हुए विद्यार्थियों में कई ऐसी कहानियां हैं, जो संघर्ष और जज्बे की मिसाल हैं। झारखंड के हजारीबाग निवासी संजीत कुमार ने दो वर्ष की उम्र में पिता को खो दिया था। घरेलू सहायिका मां की मामूली आय में पले-बढ़े संजीत ने मां की बीमारी और इलाज के अभाव को देखकर डॉक्टर बनने का संकल्प लिया। उन्होंने 12वीं में 94.4 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के बाद नीट-2026 में सफलता हासिल की।
ओडिशा के केंदुझर जिले की सोनालिशा महांता ने आर्थिक कठिनाइयों और बाल विवाह जैसी सामाजिक चुनौतियों के बावजूद हार नहीं मानी। छात्रवृत्ति बंद होने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और ज़िंदगी फाउंडेशन के सहयोग से अपने दूसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की।
केंद्रापड़ा के साहिब अख्तर और सोनपुर के सुमंत मेहर ने भी गरीबी, पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक संकट के बीच अपनी मेहनत से नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर यह साबित किया कि परिस्थितियां प्रतिभा को रोक नहीं सकतीं।
जिंदगी फाउंडेशन के संस्थापक अजय बहादुर सिंह ने कहा कि प्रतिभा हर गांव और हर गरीब परिवार में मौजूद है, जरूरत केवल अवसर और सही मार्गदर्शन की है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर बनने का उनका अपना सपना आर्थिक मजबूरियों के कारण अधूरा रह गया था। इसी अनुभव ने उन्हें ज़िंदगी फाउंडेशन की स्थापना के लिए प्रेरित किया, ताकि संसाधनों के अभाव में किसी अन्य प्रतिभाशाली विद्यार्थी का सपना अधूरा न रह जाए।
संस्था का मानना है कि डॉक्टर बनने वाला हर विद्यार्थी केवल अपना भविष्य नहीं बदलता, बल्कि अपने परिवार, गांव और समाज के लिए भी नई उम्मीद की किरण बनता है।
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