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बाहुड़ा यात्रा की तैयारियां तेज
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लगातार बारिश के बीच कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
पुरी। भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की 24 जुलाई को होने वाली पवित्र बाहुड़ा यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। परंपरा के अनुसार बुधवार सुबह ‘दक्षिण मोड़’ अनुष्ठान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया, जिसके बाद तीनों रथों को दक्षिण दिशा की ओर मोड़कर गुंडिचा मंदिर के नाकचना द्वार के समीप स्थापित कर दिया गया।
इससे पहले हेरा पंचमी के अवसर पर माता महालक्ष्मी ने परंपरा के अनुसार भगवान श्रीजगन्नाथ के नंदीघोष रथ के एक लकड़ी के हिस्से को प्रतीकात्मक रूप से क्षतिग्रस्त कर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी और फिर श्रीमंदिर लौट गई थीं।
मंगलवार को देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ को दक्षिण दिशा की ओर मोड़कर नकचाना द्वार के सामने लाया गया था। हालांकि, लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भगवान बलभद्र के तलध्वज रथ और भगवान श्रीजगन्नाथ के नंदीघोष रथ को निर्धारित समय पर मोड़ने का कार्य प्रभावित हुआ।
बुधवार सुबह शेष दोनों रथों का भी दक्षिण मोड़ अनुष्ठान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इसके बाद नंदीघोष रथ को भी नाकचना द्वार के समीप लाया गया, जिससे तीनों रथों की पुनर्स्थापना की प्रक्रिया पूरी हो गई। लगातार हो रही बारिश के कारण शरधाबली मैदान में तीनों रथों के आसपास पानी भर गया है। इसे देखते हुए प्रशासन ने रथों के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी है तथा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
अब श्रद्धालुओं की निगाहें 24 जुलाई को आयोजित होने वाली बाहुड़ा यात्रा पर टिकी हैं, जब महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर से अपने श्रीमंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे।
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