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बौद्ध विरासत और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ओडिशा सरकार ने गुरु पद्मसंभव बौद्ध महाविहार के साथ किया एमओयू

भुवनेश्वर। ओडिशा की समृद्ध बौद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में राज्य सरकार ने बुधवार को गुरु पद्मसंभव बौद्ध महाविहार, जिरंग के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस पहल का उद्देश्य बौद्ध विरासत संरक्षण, आध्यात्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शोध गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

यह एमओयू लोक सेवा भवन में पर्यटन विभाग तथा ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग, ओडिशा सरकार और गुरु पद्मसंभव बौद्ध महाविहार, जिरंग के बीच संपन्न हुआ। इस साझेदारी का उद्देश्य ओडिशा को बौद्ध विरासत, आध्यात्मिकता, बौद्ध अध्ययन और सांस्कृतिक पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

समझौते पर उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री प्रभाती  परिडा, ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज, मुख्य सचिव अनु गर्ग तथा गुरु पद्मसंभव बौद्ध महाविहार, जिरंग के अध्यक्ष हिज एमिनेंस ग्येत्रुल जिग्मे रिनपोछे की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, बौद्ध मठ समुदाय के सदस्य तथा अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री प्रभाती  परिडा ने कहा कि ओडिशा की बौद्ध विरासत राज्य की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है और पर्यटन की अपार संभावनाओं का प्रमुख आधार भी है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत बौद्ध विरासत का संरक्षण करते हुए देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को प्रामाणिक आध्यात्मिक अनुभव उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल ओडिशा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध तीर्थ और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने इस एमओयू को ओडिशा की बौद्ध परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि राज्य की बौद्ध विरासत इतिहास, दर्शन और जीवंत संस्कृति का अद्वितीय संगम है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी न केवल अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को मजबूत करेगी, बल्कि शोध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आने वाली पीढ़ियों में बौद्ध विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक होगी।

मुख्य सचिव अनु गर्ग ने इस पहल के लिए पर्यटन विभाग तथा ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक संवर्धन और सतत पर्यटन विकास के प्रति राज्य सरकार के समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

एमओयू के तहत दोनों पक्ष संयुक्त रूप से ध्यान शिविर, आध्यात्मिक अध्ययन कार्यक्रम, मठीय जीवन के अनुभव आधारित कार्यक्रम तथा बौद्ध तीर्थ यात्राओं सहित विभिन्न आध्यात्मिक और अनुभवात्मक पर्यटन गतिविधियों का विकास करेंगे।

समझौते में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, शोध, शैक्षणिक सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से बौद्ध अध्ययन को बढ़ावा देने का भी प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही रत्नागिरि-उदयगिरि-ललितगिरि-जिरंग बौद्ध सर्किट को विश्वस्तरीय विरासत, तीर्थ और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। इस दौरान विरासत संरक्षण, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने तथा सतत पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।

अधिकारियों ने विश्वास जताया कि यह साझेदारी ओडिशा को वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ सांस्कृतिक संरक्षण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और पर्यटन आधारित आर्थिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगी।

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