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ओडिशा की समृद्ध बुनकरी परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल
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हस्तकरघा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलेगा बढ़ावा
भुवनेश्वर/जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इंडोनेशियाई संसद की अध्यक्ष पुआन महारानी को ओडिशा की प्रसिद्ध इकत (बांध) हैंडीक्राफ्ट भेंट कर राज्य की समृद्ध वस्त्र परंपरा और भारतीय हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई।
ओडिशा की इकत, जिसे स्थानीय रूप से बंधा भी कहा जाता है, राज्य की सबसे प्रतिष्ठित हस्तकरघा परंपराओं में से एक है। यह वस्त्र अपनी विशिष्ट टाई-एंड-डाई (बंधनी रंगाई) तकनीक के लिए जाना जाता है, जिसमें धागों को बुनाई से पहले ही विशेष ढंग से बांधकर रंगा जाता है। इसी प्रक्रिया के कारण कपड़े पर दोनों ओर एक समान डिजाइन उभरते हैं तथा घुमावदार आकृतियां और महीन किनारे इसकी विशेष पहचान बनते हैं।
ओडिशा के संबलपुर, नुआपाटणा और बरगढ़ जैसे प्रमुख बुनाई केंद्रों में पीढ़ियों से इस कला को संरक्षित और विकसित किया जा रहा है। आकर्षक रंगों और पारंपरिक डिजाइनों से सजी इकत केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत, लोककला और बुनकरों की उत्कृष्ट शिल्पकला का जीवंत प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस हस्तकरघा कृति को उपहार के रूप में प्रस्तुत करना न केवल ओडिशा के बुनकरों और शिल्पकारों के सम्मान का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को भी नई मजबूती प्रदान करता है। माना जा रहा है कि इस पहल से ओडिशा की इकत को वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान मिलेगी तथा भारतीय हस्तकरघा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा मिलेगा।
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