-
उपराष्ट्रपति ने लॉन्च किया हाई सीज फिशिंग के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन सिस्टम
भुवनेश्वर। भारत की समुद्री मत्स्य संपदा और ब्लू इकोनॉमी के इतिहास में गुरुवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। राजधानी भुवनेश्वर स्थित ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग ऑफ फिशरीज इन द हाई सीज’ के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन प्रणाली का राष्ट्रीय शुभारंभ किया। इसी अवसर पर ‘ओडिशा डीप-सी फिशिंग मिशन डॉक्यूमेंट (2026-2036)’ का भी औपचारिक लोकार्पण किया गया।
यह कार्यक्रम भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, विभिन्न मत्स्य सहकारी समितियों तथा गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के मालिकों को लेटर ऑफ ऑथराइजेशन वितरित किए गए। इसके माध्यम से योग्य भारतीय जहाजों को देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र से बाहर अंतरराष्ट्रीय समुद्री जलक्षेत्र में नियंत्रित एवं जिम्मेदार तरीके से उच्च मूल्य वाली मछलियां, विशेषकर टूना, पकड़ने की अनुमति मिलेगी।
समुद्री खाद्य निर्यात को मिलेगा नया आयाम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 73,890 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात कर विश्व में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि अभी तक अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां तट से 40-50 नॉटिकल मील तक सीमित हैं, जबकि नई व्यवस्था के तहत भारतीय मछुआरे अंतरराष्ट्रीय समुद्री जलक्षेत्र में जाकर उच्च मूल्य वाली मछलियों का दोहन कर सकेंगे। इससे देश की खाद्य सुरक्षा, पोषण और निर्यात क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।
लेटर ऑफ ऑथराइजेशन प्राप्त करना अनिवार्य
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा सतत गहरे समुद्र में मत्स्य दोहन हेतु दिशा-निर्देश-2025’ के तहत लेटर ऑफ ऑथराइजेशन प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह केवल संबंधित जहाज के लिए ही मान्य रहेगा और हस्तांतरणीय नहीं होगा।
रियल टाइम ट्रैकिंग और डेटा आधारित संचालन सुनिश्चित होगा
उन्होंने बताया कि यह प्रणाली ‘रीयलक्राफ्ट फिशिंग वेसल रजिस्ट्रेशन पोर्टल’ से जुड़ी होगी, जिससे जहाजों की ऑनलाइन निगरानी, रियल टाइम ट्रैकिंग और डेटा आधारित संचालन सुनिश्चित होगा। इससे गहरे समुद्र में मत्स्य दोहन पूरी तरह पारदर्शी और उत्तरदायी बनेगा तथा भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
उपराष्ट्रपति ने ओड़िया भाषा में की संबोधन की शुरुआत
अपने संबोधन की शुरुआत उपराष्ट्रपति ने भगवान जगन्नाथ को नमन करते हुए ओड़िया भाषा में की। उन्होंने कहा कि ओडिशा की ऐतिहासिक बालियात्रा और बोइत बंदाण जैसी परंपराएं राज्य की गौरवशाली समुद्री व्यापार संस्कृति का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक डीप-सी फिशिंग मिशन इस ऐतिहासिक विरासत को नई तकनीक के साथ पुनर्जीवित करेगा।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
