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तीन फाटक बाईं ओर और एक दाईं ओर से खोला गया
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उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा की मौजूदगी में हुई शुरुआत
संबलपुर। संबलपुर स्थित हीराकुद जलाशय से इस वर्ष पहली बार बाढ़ के पानी की निकासी शुरू कर दी गई। उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिडा तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में विधि-विधान और पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद जलाशय के चार फाटक खोले गए, जिसके साथ ही बाढ़ प्रबंधन की प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
अधिकारियों के अनुसार, जलाशय के बाईं ओर के तीन तथा दाईं ओर के एक फाटक से महानदी में पानी छोड़ा गया। इन चारों फाटकों से लगभग 64 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
इसके अलावा, बिजली उत्पादन नहरों और सिंचाई नहरों के माध्यम से भी पानी छोड़ा जा रहा है। इस प्रकार कुल मिलाकर लगभग 95 हजार क्यूसेक पानी का प्रवाह हो रहा है।
जलाशय में 1.74 लाख क्यूसेक पानी की आवक
अधिकारियों ने बताया कि हीराकुद जलाशय में वर्तमान में 1.74 लाख क्यूसेक प्रति सेकंड की दर से पानी की आवक हो रही है। लगातार जलस्तर की निगरानी की जा रही है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
फिलहाल बाढ़ का कोई खतरा नहीं : मुख्य अभियंता
हीराकुद बांध एवं अपर महानदी बेसिन के मुख्य अभियंता प्रताप चंद्र चौधरी ने बताया कि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में इस समय वर्षा कम हो रही है। इसके साथ ही मुंडली में जलस्तर भी घट रहा है, जिससे निचले क्षेत्रों में बाढ़ का तत्काल कोई खतरा नहीं है।
उन्होंने कहा कि संबलपुर से छोड़ा गया पानी लगभग 36 घंटे बाद मुंडली पहुंचेगा। तब तक वहां का जलस्तर और कम हो जाने की संभावना है, जिससे बाढ़ की आशंका काफी हद तक कम रहेगी।
शाम तक पांच और फाटक खोले जा सकते हैं
मुख्य अभियंता ने बताया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो शाम तक पांच और फाटक खोले जा सकते हैं, जिससे खुले हुए फाटकों की कुल संख्या बढ़कर नौ हो जाएगी। जलाशय की स्थिति, वर्षा और जलप्रवाह पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा।
बाढ़ प्रबंधन के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क
राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग ने कहा है कि हीराकुद जलाशय से पानी छोड़ने की पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक आकलन और लगातार निगरानी के आधार पर संचालित की जा रही है। प्रशासन ने निचले क्षेत्रों के जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी संभावित स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
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