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समसामयिक मुद्दों पर कवियों के तीखे व्यंग्य ने बांधा समां

  •     भजनों, पुरानी गीतों और द्रौपदी चीरहरण की मार्मिक प्रस्तुति ने श्रोताओं को किया भावविभोर

भुवनेश्वर। स्थानीय अनुज हिन्दी पुस्तकालय, सत्यनगर में आयोजित हिंदी कविता पाठ का आयोजन साहित्य, भक्ति और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम बन गया। कार्यक्रम में कवियों ने जहां भगवान जगन्नाथ की महिमा और पंचसखा की साहित्यिक विरासत को अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की, वहीं समसामयिक सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर तीखे व्यंग्य और कटाक्ष कर श्रोताओं को सोचने पर भी मजबूर कर दिया। भक्ति रस से ओतप्रोत भजनों, सदाबहार पुराने गीतों और द्रौपदी चीरहरण की पीड़ा पर आधारित मार्मिक प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों की आंखें नम कर दीं और पूरे सभागार को भावनाओं से सराबोर कर दिया।

पंचसखा की साहित्यिक विरासत को किया नमन

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि रामकिशोर शर्मा ने की। इस मौके पर प्रारंभिक संबोधन में अशोक पाण्डेय ने कहा कि वर्ष 2026 की रथयात्रा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ के पांच महान भक्त कवियों, बलराम दास, जगन्नाथ दास, अच्युतानंद दास, यशोवंत दास और अनंत दास की स्मृति को समर्पित यह आयोजन उनके साहित्यिक और आध्यात्मिक योगदान को याद करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि पंचसखा ने अपनी अमर कृतियों के माध्यम से जगन्नाथ संस्कृति के प्रचार-प्रसार में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

व्यंग्यभक्ति और संवेदना का अद्भुत संगम

कवियों ने अपनी रचनाओं में वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय परिस्थितियों पर जमकर कटाक्ष किए। हास्य-व्यंग्य से लेकर गंभीर चिंतन तक, हर प्रस्तुति ने श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी। कई कवियों ने भगवान जगन्नाथ को समर्पित भजनों की प्रस्तुति दी, जबकि कुछ कवियों ने सदाबहार पुराने गीतों को अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। महाभारत के द्रौपदी चीरहरण प्रसंग पर आधारित काव्य प्रस्तुति ने नारी सम्मान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का ऐसा सजीव चित्र खींचा कि पूरा सभागार कुछ क्षणों के लिए मौन हो गया।

मंच पर रामकिशोर शर्मा, किशन खण्डेलवाल, मुरारीलाल लढानिया और अशोक पाण्डेय उपस्थित रहे।

इस मौके पर अनुज हिन्दी पुस्तकालय के संरक्षक सुभाष चन्द्र भूरा ने स्वागत भाषण दिया तथा अपनी शुभकामनाएं देते हुए खुशी जाहिर की कि यह मंच युवा साहित्यकारों के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित हो रहा है।

रथयात्रा से पहले जगन्नाथ संस्कृति के प्रचार का संदेश

कार्यक्रम में प्रस्तुत अधिकांश रचनाओं का केंद्र भगवान जगन्नाथ और पंचसखा की महान परंपरा रही। आगामी 16 जुलाई को होने वाली रथयात्रा के मद्देनजर आयोजित इस काव्य संध्या ने न केवल श्रद्धा और साहित्य का संदेश दिया, बल्कि जगन्नाथ संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी सार्थक प्रयास किया। उपस्थित श्रोताओं ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे भक्ति, साहित्य और सामाजिक चेतना का यादगार संगम बताया।

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