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अब साल में होंगे चार मूल्यांकन
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दो फॉर्मेटिव और दो समेटिव आकलन होंगे
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सामाजिक एवं भावनात्मक विकास का भी होगा मूल्यांकन
भुवनेश्वर। ओडिशा के स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग ने कक्षा तीन से आठ तक के विद्यार्थियों के मूल्यांकन की प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब विद्यार्थियों का एक शैक्षणिक वर्ष में चार बार मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सभी स्कूलों में नई प्रणाली को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में विद्यार्थियों के दो फॉर्मेटिव असेसमेंट (एफए) और दो समेटिव असेसमेंट (एसए) होंगे। अप्रैल से सितंबर के बीच एक फॉर्मेटिव और एक समेटिव मूल्यांकन कराया जाएगा, जबकि अक्टूबर से मार्च के बीच शेष दोनों मूल्यांकन संपन्न होंगे।
जुलाई में होगी पहली परीक्षा
संशोधित कार्यक्रम के अनुसार पहला फॉर्मेटिव असेसमेंट (एफए-1) जुलाई में आयोजित होगा। इसमें छह विषयों की 25-25 अंकों की परीक्षा ली जाएगी। इसके बाद सितंबर तक पहला समेटिव असेसमेंट (एसए-1) कराया जाएगा, जिसमें प्रत्येक विषय 50 अंकों का होगा।
शिक्षकों का सतत मूल्यांकन भी होगा शामिल
लिखित परीक्षाओं के अलावा शिक्षक विद्यार्थियों के कक्षा में प्रदर्शन, सहभागिता और सतत मूल्यांकन के आधार पर प्रत्येक विषय में 25 अंक देंगे। इस प्रकार शैक्षणिक वर्ष के पहले छह महीनों में प्रत्येक विषय के लिए कुल 100 अंकों का मूल्यांकन होगा। छह विषयों के लिए यह कुल 600 अंक होंगे।
इसी प्रकार शैक्षणिक वर्ष के दूसरे चरण में एफए-2 और एसए-2 के साथ प्रत्येक विषय में 25 अंकों का शिक्षक मूल्यांकन भी किया जाएगा। पूरे वर्ष में विद्यार्थियों का कुल मूल्यांकन 1,200 अंकों के आधार पर होगा।
सामाजिक और भावनात्मक विकास का भी होगा आकलन
स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के सामाजिक और भावनात्मक विकास के मूल्यांकन की भी नई व्यवस्था शुरू की है। वर्ष में चार बार कक्षा में विद्यार्थियों के व्यवहार, सहभागिता और शिक्षक-विद्यार्थी संवाद के आधार पर उनका आकलन किया जाएगा। इस मूल्यांकन का विवरण भी विद्यार्थियों की रिपोर्ट कार्ड में दर्ज किया जाएगा।
समग्र विकास पर रहेगा जोर
विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई मूल्यांकन प्रणाली का उद्देश्य केवल वार्षिक परीक्षा पर निर्भर रहने के बजाय पूरे वर्ष विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति पर लगातार नजर रखना है। नई व्यवस्था से विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनके समग्र, सामाजिक और भावनात्मक विकास को भी समान महत्व दिया जाएगा।
कक्षा 1-2 में नहीं होगी लिखित परीक्षा
विभाग के अनुसार, कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों के लिए ‘लर्निंग लैडर रजिस्टर’ लागू किया जाएगा, जिसमें बच्चों की सीखने की प्रगति का मासिक आधार पर रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके माध्यम से शिक्षकों को विद्यार्थियों के कौशल विकास का आकलन करने तथा शिक्षण की आगामी रणनीति तैयार करने में सहायता मिलेगी। विभाग ने कक्षा 1 और 2 के लिए किसी भी प्रकार की औपचारिक लिखित परीक्षा पर रोक लगा दी है। इन कक्षाओं के विद्यार्थियों का मूल्यांकन केवल कक्षा में उनकी सहभागिता, व्यवहार, सीखने की प्रक्रिया तथा दैनिक गतिविधियों के दौरान किए गए शिक्षकों के नियमित अवलोकन के आधार पर किया जाएगा।
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