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 हड़ताली डॉक्टरों पर सरकार सख्त, वेतन रोकने और कार्रवाई के दिए निर्देश

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य में जारी डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए ‘नो वर्क-नो पे’ (काम नहीं, वेतन नहीं) नीति लागू करने का फैसला किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (ओएमएसए) के बैनर तले हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए हड़ताल में शामिल ओडिशा मेडिकल एंड हेल्थ सर्विसेज (ओएमएचएस) कैडर के चिकित्सकों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश जारी किए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों के अधिकारियों, मुख्य जिला चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अधिकारियों (सीडीएमओ) तथा जनस्वास्थ्य अधिकारियों (पीएचओ) को भेजे गए पत्र में निर्देश दिया है कि हड़ताल में शामिल संविदा चिकित्सकों को नोटिस जारी किया जाए और निर्धारित समय में ड्यूटी पर नहीं लौटने की स्थिति में उन्हें सेवा से हटाने की कार्रवाई की जाए।
इससे पहले राज्य सरकार ने हड़ताल कर रहे डॉक्टरों से आंदोलन समाप्त कर तत्काल कार्य पर लौटने और वार्ता में शामिल होने की अपील की थी। सरकार ने कहा कि मरीजों को निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और डॉक्टरों की सभी वास्तविक एवं न्यायोचित मांगों पर उनके ड्यूटी पर लौटने के बाद गंभीरता से विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि, ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के आह्वान पर राज्यभर के सरकारी डॉक्टर एक जुलाई से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में पात्रता की तिथि से केंद्र सरकार की वेतन संरचना के अनुरूप डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) योजना लागू करना, कैडर का अनुपातिक पुनर्गठन तथा सुपर स्पेशियलिस्ट, स्पेशियलिस्ट, डिप्लोमा धारक चिकित्सकों और प्रशासकों के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन शामिल हैं।
इसके अलावा डॉक्टर पोस्टमार्टम भत्ता, केबीके एवं ट्राइबल सब-प्लान (टीएसपी) क्षेत्रों में तीन वर्ष की एग्जिट नीति लागू करने, भुवनेश्वर में कैपिटल हॉस्पिटल-2 के निर्माण, ओडिशा मेडिकेयर अधिनियम में संशोधन के माध्यम से चिकित्सकों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने, तदर्थ (एड-हॉक) डॉक्टरों के नियमितीकरण तथा सभी स्वास्थ्यकर्मियों के लिए व्यापक स्वास्थ्य बीमा सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग कर रहे हैं।
सरकार और हड़ताली डॉक्टरों के बीच गतिरोध फिलहाल जारी है, जबकि राज्य के कई सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

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