भुवनेश्वर। भुवनेश्वर-कटक कमिश्नरेट पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट‘ के नाम पर हो रही साइबर ठगी को लेकर आम नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट‘ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। न तो पुलिस और न ही कोई अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसी किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल, फोन कॉल, टेक्स्ट मैसेज या किसी अन्य डिजिटल माध्यम से गिरफ्तार करती है। साथ ही, किसी भी आधिकारिक जांच के दौरान जांच एजेंसियां नागरिकों को किसी मोबाइल एप से जुड़ने के लिए नहीं कहती हैं।
कमिश्नरेट पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को ऐसा कोई संदिग्ध फोन कॉल आए, जिसमें उसे ‘डिजिटल अरेस्ट‘ या किसी आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दी जाए, तो वह तुरंत कॉल काट दें। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें, फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) या पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) जैसी निवेश योजनाओं को समय से पहले न तोड़ें और किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
पुलिस ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ इस प्रकार की साइबर ठगी का प्रयास होता है या वह इसका शिकार बनता है, तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करे या https://cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए। इसके अलावा सहायता के लिए भुवनेश्वर साइबर क्राइम एवं आर्थिक अपराध थाना के मोबाइल नंबर 7440006709 तथा कटक साइबर क्राइम एवं आर्थिक अपराध थाना के मोबाइल नंबर 8280405695 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
कमिश्नरेट पुलिस ने नागरिकों से किसी भी कानून प्रवर्तन एजेंसी के नाम पर आने वाले फोन कॉल या संदेश की सत्यता की जांच करने तथा सतर्क रहकर साइबर ठगी से बचने की अपील की है।
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