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स्टॉक मार्केट में जिवियल इंडस्ट्रीज की कमजोर शुरुआत, घाटे में आईपीओ निवेशक

नई दिल्ली। अल्युमिनियम और स्टेनलेस स्टील की रेलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चरल मटेरियल्स तैयार करने वाली कंपनी जिवियल इंडस्ट्रीज के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट ने जबरदस्त कमजोरी के साथ एंट्री कर अपने आईपीओ निवेशकों को निराश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 196 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 20 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 156.80 रुपये के स्तर पर हुई।
लिस्टिंग के बाद बिकवाली का दबाव बनने पर कंपनी के शेयर कुछ देर में ही 149.50 रुपये के स्तर तक गिर गए। हालांकि, बाद में लिवाली के सपोर्ट से ये शेयर एक बार फिर 156.80 रुपये के स्तर तक पहुंच गए। लिवाली शुरू होने पर इसने 164.60 रुपये तक की छलांग भी लगाई। पूरे दिन के कारोबार के बाद जिवियल इंडस्ट्रीज के शेयर 159 रुपये के स्तर पर बंद हुए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी के आईपीओ निवेशकों को प्रति शेयर 37 रुपये यानी 18.88 प्रतिशत का झटका लग गया।
जिवियल इंडस्ट्रीज का 31.99 करोड़ रुपये का आईपीओ 23 से 25 जून के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से फीका रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 0.93 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 1.57 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। जबकि रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन सिर्फ 0.22 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 27 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए गए हैं, जबकि 2,72,400 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी नई मशीनरी खरीदने, मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का रिनोवेशन करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।
जिवियल इंडस्ट्रीज की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 1.17 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 2.41 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 2.97 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को 2.95 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका था।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 8.40 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 11.06 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 12.07 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को 12.20 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका था।
इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 18 लाख रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 44 लाख रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में कम होकर 38 लाख रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक की बात करें, तो इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 1.23 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया था।
इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 1.53 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 5.75 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का नेटवर्थ 8.72 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 11.66 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी इस अवधि में बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 1.52 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 2.44 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 5.41 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 8.35 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 1.42 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 3.08 करोड़ रुपये और 2024-25 में 3.75 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 3.76 करोड़ रुपये के स्तर पर था।
साभार – हिस

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