- भुवनेश्वर में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने बांधा समां, देर रात तक गूंजती रहीं तालियां
- सुदीप भोला के समसामयिक व्यंग्य, श्वेता सिंह के श्रृंगार रस और अनिल चौबे की चुटीली प्रस्तुति ने जीता श्रोताओं का दिल
भुवनेश्वर। राजधानी भुवनेश्वर का भंज कला मंडप मंगलवार की रात कविता, हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार, संवेदना और राष्ट्रभावना के रंगों से सराबोर रहा। दैनिक जागरण द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध बनाए रखा। समसामयिक विषयों पर तीखे व्यंग्य, प्रेम और संवेदनाओं से ओतप्रोत रचनाएं, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से जुड़ी कविताएं तथा मंचीय प्रस्तुति की प्रभावशीलता ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।
- सुदीप भोला का व्यवस्था की विसंगतियों पर तीखा प्रहार
हास्य-व्यंग्य के लोकप्रिय कवि सुदीप भोला ने अपनी धारदार शैली से लोकतंत्र, वोटर लिस्ट, एसआईआर, राजनीति और समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति जैसे समसामयिक विषयों को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी व्यंग्यात्मक रचनाओं में व्यवस्था की विसंगतियों पर तीखा प्रहार भी था और समाज को जागरूक करने का संदेश भी। उनकी प्रस्तुति पर सभागार कई बार ठहाकों से गूंज उठा। उन्होंने बिहार के साथ-साथ बंगाल में हुए चुनाओं को लेकर भी कटाक्ष किया तथा ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की गलबहियां को भी रचनाओं में लेपेटा।
व्यंग्य के बीच उन्होंने अपनी चर्चित कविताओं का पाठ कर पूरे वातावरण को भावुक बना दिया। परिवार, रिश्तों और भारतीय संस्कारों पर आधारित इस रचना ने श्रोताओं के मन को गहराई से स्पर्श किया। कविता समाप्त होते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद महाकुंभ और ऑपरेशन सिंदूर जैसे विषयों पर आधारित उनकी राष्ट्रभावना से ओतप्रोत कविताओं को भी श्रोताओं ने भरपूर सराहना दी।
- श्वेता सिंह ने श्रृंगार रस कार्यक्रम में अलग ही रंग भरा
कवयित्री श्वेता सिंह ने श्रृंगार रस की मधुर, भावपूर्ण और संवेदनशील रचनाओं से कार्यक्रम में अलग ही रंग भर दिया। प्रेम, मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की गहराई को उन्होंने सहज अभिव्यक्ति के साथ प्रस्तुत किया। उनकी कविताओं ने विशेष रूप से युवा श्रोताओं को आकर्षित किया और हर प्रस्तुति के बाद सभागार तालियों से गूंज उठता रहा।
कवयित्री श्वेता सिंह ने प्रेम, संवेदना और मानवीय भावनाओं को केंद्र में रखकर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनकी कविताओं में श्रृंगार रस की सहज अभिव्यक्ति और भावों की गहराई ने विशेष रूप से युवा श्रोताओं को आकर्षित किया। उनकी प्रस्तुति के दौरान सभागार में कई बार तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दी। श्रोताओं ने उनकी प्रत्येक रचना का भरपूर आनंद लिया और जोरदार तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
- शायर नदीम शाद की शायरी ने बांधा समां, अदायगी पर देर तक बजती रहीं तालियां
- इश्क, जिंदगी और समाज के एहसासों को अल्फाजों में पिरोकर श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
मशहूर शायर नदीम शाद ने अपनी दिलकश शायरी और बेहतरीन अंदाज़-ए-बयां से महफिल में अलग ही रंग भर दिया। उन्होंने इश्क, जिंदगी, रिश्तों, इंसानी जज़्बात और सामाजिक सरोकारों पर आधारित अपनी ग़ज़लों और शेरों को इतनी खूबसूरती से पेश किया कि श्रोता पूरी तरह उनकी शायरी में डूब गए। उनकी हर पंक्ति पर सभागार से “वाह-वाह”, “मुकर्रर अर्ज़ है” और जोरदार तालियों की गूंज सुनाई देती रही।
नदीम शाद की प्रभावशाली प्रस्तुति, सधी हुई आवाज़ और शब्दों की गहराई ने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा। उन्होंने गंभीर भावों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज़ में भी कई शेर सुनाए, जिन पर श्रोता मुस्कुराने और ठहाके लगाने को मजबूर हो गए। उनकी शायरी ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि जीवन और समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए भी प्रेरित किया। उनके मंच से उतरने तक पूरा सभागार लगातार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
- अनिल चौबे ने मस्ती को अपनी कविताओं में जीवंत कर दिया
वहीं हास्य-व्यंग्य के चर्चित कवि अनिल चौबे ने अपने बनारसी अंदाज से मंच संभालते ही माहौल को ठहाकों से भर दिया। उन्होंने बनारस की संस्कृति, लोकजीवन और वहां की मस्ती को अपनी कविताओं में जीवंत कर दिया। इसके बाद समसामयिक राजनीति और व्यवस्था पर उनके सटीक एवं स्वस्थ व्यंग्य ने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। उनकी प्रस्तुति के दौरान कई बार लगातार बजती तालियों के कारण उन्हें अपनी कविता कुछ क्षणों के लिए रोकना पड़ा।
पूरे कवि सम्मेलन के दौरान हास्य, व्यंग्य, वीर रस, श्रृंगार और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रोताओं ने सभी कवियों की प्रस्तुतियों का पूरे उत्साह के साथ स्वागत किया और देर रात तक सभागार में डटे रहे। साहित्य प्रेमियों का उत्साह इस बात का प्रमाण था कि भुवनेश्वर में इस स्तर के साहित्यिक आयोजनों के प्रति लोगों की गहरी रुचि है।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और गणमान्य नागरिकों ने भी आयोजन की सराहना करते हुए इसे सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, लोगों को भारतीय संस्कृति और साहित्य से जोड़ते हैं तथा विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और सामाजिक सौहार्द को मजबूत बनाते हैं।
- देशभक्ति की ओजस्वी कविताओं से गूंजा सभागार, विनीत चौहान ने श्रोताओं में भरा राष्ट्रगौरव का जज़्बा
- चार साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान को किया नमन, समसामयिक विसंगतियों पर तीखे व्यंग्य से भी बटोरी खूब वाहवाही
देशभक्ति के ओजस्वी कवि विनीत चौहान ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से पूरे सभागार में राष्ट्रप्रेम का अद्भुत वातावरण बना दिया। उनकी जोशीली कविताओं ने श्रोताओं के रोंगटे खड़े कर दिए और बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा। उन्होंने सिख इतिहास के अमर अध्याय गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों के अतुलनीय बलिदान को भावपूर्ण शब्दों में याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी ओजपूर्ण प्रस्तुति ने वीरता, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को जीवंत कर दिया, जिससे अनेक श्रोता भावुक हो उठे।
देशभक्ति के साथ-साथ विनीत चौहान ने अपनी कविताओं में वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक विसंगतियों पर भी सटीक व्यंग्य किए। उन्होंने व्यवस्था की कमियों, सामाजिक चुनौतियों और बदलते मूल्यों पर तीखे कटाक्ष करते हुए समाज को आत्ममंथन का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति में ओज, संवेदना और व्यंग्य का ऐसा संतुलन देखने को मिला जिसने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा। हर कविता के बाद सभागार तालियों और “वाह-वाह” की गूंज से देर तक गूंजता रहा।
वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर शर्मा, उद्योगपति एवं समाजसेवी प्रबोध मोहंती, भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसाइटी के अध्यक्ष संजय लाठ, आकाश के डायरेक्टर अजय बहादुर सिंह, अनिल कुमार राय, शंकर यादव चंद्रशेखर सिंह, संपत्ति मोड़ा, वीरेंद्र बेतला, साकेत अग्रवाल, रमाशंकर रुंगटा, किशन खंडेलवाल सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों ने कहा कि भुवनेश्वर में लंबे समय बाद इतने भव्य स्तर का कवि सम्मेलन देखने को मिला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से समाज को जोड़ने का प्रयास जारी रहना चाहिए।
देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन के समापन के बाद भी लोगों के बीच कविताओं, कवियों और उनकी प्रभावशाली प्रस्तुतियों की चर्चा होती रही। साहित्य, संस्कृति, हास्य, संवेदना और राष्ट्रभावना से सजी यह शाम भुवनेश्वर के सांस्कृतिक इतिहास में लंबे समय तक याद की जाएगी।
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