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डेढ़ घंटे तक बाधित रहा यातायात
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प्रशासन ने देर रात कार्रवाई कर खुलवाया मार्ग
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70 प्रतिशत धान उठाव का दिया आश्वासन
नुआपड़ा। रबी धान की खरीद और मंडियों से समय पर उठाव नहीं होने से नाराज किसानों ने ओडिशा के नुआपड़ा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-353 (एनएच-353) को जाम कर दिया। किसानों ने खड़ियार ब्लॉक की विभिन्न मंडियों के पास धान से भरे बोरे सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे करीब डेढ़ घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। देर रात प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद राजमार्ग को खाली कराया गया और यातायात बहाल किया गया।
धान उठाव में देरी से नाराज किसान
किसानों का आरोप था कि सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदे जाने के बावजूद मंडियों से समय पर उठाव नहीं किया जा रहा है। लंबे समय से खुले में रखे धान के खराब होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने कहा कि कई बार अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके कारण उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।
प्रशासन ने दिया 70 प्रतिशत धान उठाने का भरोसा
प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर उन्हें आश्वस्त किया कि खड़ियार, सनमहेश्वर, अराड़ा, भोजपुर, दुआझार, बरगांव, लांझी और खड़ापेज सहित विभिन्न मंडियों में पड़े लगभग 70 प्रतिशत धान का शीघ्र उठाव कराया जाएगा। हालांकि किसान इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए और प्रदर्शन जारी रखा।
देर रात पुलिस ने हटवाया जाम
स्थिति को देखते हुए देर रात करीब 1:30 बजे मजिस्ट्रेट और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सड़क पर रखे धान के बोरों को हटाया और राष्ट्रीय राजमार्ग-353 को फिर से यातायात के लिए खोल दिया। इसके बाद वाहनों की आवाजाही सामान्य हो सकी।
हजारों क्विंटल धान अब भी मंडियों में पड़ा
प्रशासन के अनुसार विभिन्न मंडियों में अभी भी बड़ी मात्रा में धान उठाव का इंतजार कर रहा है। इनमें खड़ियार मंडी में 23,700 क्विंटल, सनमाहेश्वर में 8,370 क्विंटल, अरड़ा में 11,670 क्विंटल, भोजपुर में 9,350 क्विंटल, डुआझर में 9,000 क्विंटल, बड़गांव में 10,836 क्विंटल, लांझी में 9,212 क्विंटल और खड़ापेज में 8,280 क्विंटल धान का उठाव होना बाकी है।
किसानों ने खुद किया प्रदर्शन का खर्च वहन
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना था कि यह आंदोलन पूरी तरह किसानों द्वारा आयोजित किया गया और इसका पूरा खर्च भी उन्होंने स्वयं उठाया। हालांकि स्थानीय स्तर पर बीजद और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आंदोलन को नैतिक समर्थन दिया।
धान खरीद व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने नुआपड़ा जिले में रबी धान खरीद और उठाव व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि समय पर धान का उठाव नहीं होने से उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ भंडारण की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द सभी मंडियों से धान उठाने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने के लिए स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है।
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