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ओसेपा ने जारी किए दिशा-निर्देश, अभिभावकों की होगी 75 प्रतिशत भागीदारी, महिलाओं को मिलेगा 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य के सभी सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में 1 जुलाई 2026 से नई स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) के गठन का निर्णय लिया है। वर्तमान स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) तथा स्कूल प्रबंधन एवं विकास समितियों (एसएमडीसी) का कार्यकाल 30 जून को समाप्त होने के बाद यह प्रक्रिया शुरू होगी। इस संबंध में ओडिशा स्कूल शिक्षा कार्यक्रम प्राधिकरण (ओसेपा) ने सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक विद्यालय में अलग-अलग एसएमसी और एसएमडीसी के स्थान पर केवल एकीकृत स्कूल प्रबंधन समिति गठित की जाएगी। इसके अंतर्गत दो उपसमितियां भी बनाई जाएंगी। पहली स्कूल भवन समिति, जो विद्यालय के भवन, आधारभूत संरचना और रखरखाव की निगरानी करेगी, जबकि दूसरी शैक्षणिक समिति शिक्षण व्यवस्था, विद्यार्थियों की उपलब्धियों और शैक्षणिक गतिविधियों पर नजर रखेगी। सरकार का उद्देश्य विद्यालय प्रबंधन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है।
छात्र संख्या के आधार पर होगा समिति का गठन
ओसेपा के दिशा-निर्देशों के अनुसार विद्यालयों में छात्रों की संख्या के आधार पर समिति का आकार तय किया जाएगा। 100 तक छात्र संख्या वाले विद्यालयों में 12 से 15 सदस्य, 100 से 500 छात्रों वाले विद्यालयों में 15 से 20 सदस्य तथा 500 से अधिक छात्रों वाले विद्यालयों में 20 से 25 सदस्यीय स्कूल प्रबंधन समिति गठित की जाएगी।
अभिभावकों और महिलाओं को मिलेगा प्रमुख स्थान
नई व्यवस्था में समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। समिति के लगभग 75 प्रतिशत सदस्य विद्यार्थियों के अभिभावक या संरक्षक होंगे। साथ ही कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएं होंगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के अभिभावकों को भी समिति में प्रतिनिधित्व देना अनिवार्य किया गया है, ताकि विद्यालय प्रबंधन अधिक समावेशी और लोकतांत्रिक बन सके।
17 जुलाई तक होगा गठन, 22 जुलाई तक भेजनी होगी रिपोर्ट
ओसेपा द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 1 से 15 जुलाई के बीच अभिभावक-शिक्षक बैठकें आयोजित कर समिति के सदस्यों का चयन या निर्वाचन किया जाएगा। 17 जुलाई को स्कूल प्रबंधन समिति का औपचारिक गठन होगा, जबकि 22 जुलाई तक समिति के गठन संबंधी प्रस्ताव और सभी विवरण ओसेपा को भेजने होंगे।
इन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का करेगी निर्वहन
नई स्कूल प्रबंधन समितियां विद्यार्थियों की उपस्थिति, मध्याह्न भोजन योजना के संचालन, विद्यालय की आधारभूत संरचना, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन तथा विभिन्न सरकारी शैक्षणिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेंगी। समितियां प्रत्येक माह बैठक आयोजित करेंगी और अपने निर्णयों का विधिवत अभिलेख भी रखेंगी, जिससे विद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
सरकार के अनुसार यह नई व्यवस्था शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा समग्र शिक्षा अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप लागू की जा रही है। इसका लक्ष्य विद्यालयों के प्रबंधन में जनभागीदारी बढ़ाना तथा राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।
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