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विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने बीजद की मांग ठुकराई
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कानूनी प्रक्रिया में खामियां बताईं
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याचिका के साथ कोई शपथपत्र भी संलग्न नहीं किया गया
भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने राज्यसभा चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग के आरोपों को लेकर बीजू जनता दल (बीजद) द्वारा अपने आठ विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग संबंधी याचिका को खारिज कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, याचिका को कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप सत्यापित नहीं किए जाने के कारण अस्वीकार किया गया। शिकायत के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का प्रमाणीकरण नहीं किया गया था। इसके अलावा याचिका के साथ कोई शपथपत्र (एफिडेविट) भी संलग्न नहीं किया गया था।
याचिकाओं में गंभीर प्रक्रियागत खामियां
सूत्रों ने बताया कि याचिकाओं में गंभीर प्रक्रियागत खामियां पाई गईं और उन्हें “संक्षिप्त, अस्पष्ट तथा अपर्याप्त साक्ष्यों पर आधारित” माना गया। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अयोग्यता संबंधी कार्यवाही तभी शुरू की जा सकती है जब कानून द्वारा निर्धारित सभी वैधानिक आवश्यकताओं का पूरी तरह पालन किया गया हो।
अप्रैल में बीजद ने दायर की थी याचिका
गौरतलब है कि अप्रैल में बीजद ने 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में कथित रूप से क्रॉस वोटिंग करने वाले आठ विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर की थी। विपक्ष की मुख्य सचेतक और बीजद विधायक प्रमिला मल्लिक ने इन याचिकाओं पर हस्ताक्षर किए थे।
इन आठ विधायकों के खिलाफ की गई थी कार्रवाई
जिन आठ विधायकों के खिलाफ याचिका दायर की गई थी, उनमें से दो, अरविंद महापात्र और सनातन महाकुड़, को राज्यसभा चुनाव से पहले ही बीजद ने निलंबित कर दिया था।
चुनाव के बाद पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया और छह अन्य विधायकों को भी निलंबित कर दिया। इनमें चक्रमणि कंहर, नव किशोर मलिक, सौविक बिस्वाल, सुभासिनी जेना, रमाकांत भोई और देवी रंजन त्रिपाठी शामिल हैं।
क्रॉस वोटिंग से बदला था चुनावी परिणाम
उल्लेखनीय है कि इन विधायकों की कथित क्रॉस वोटिंग के कारण बीजद और कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दत्तेश्वर होता चुनाव हार गए थे, जबकि भाजपा समर्थित दिलीप राय उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए थे।
राज्यसभा चुनाव में हुई इस क्रॉस वोटिंग को लेकर राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा हुई थी और बीजद ने इसे पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन बताते हुए संबंधित विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि अब विधानसभा अध्यक्ष द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद इस मामले में बीजद को बड़ा झटका माना जा रहा है।
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