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ओडिशा में पहली बार बहु-एजेंसी समुद्री सुरक्षा समूह की बैठक

  •     तटीय सुरक्षा, निगरानी तंत्र और बंदरगाह सुरक्षा को मजबूत बनाने पर हुआ मंथन

भुवनेश्वर। ओडिशा ने पहली बार बहु-एजेंसी समुद्री सुरक्षा समूह (एमएएमएसजी) की बैठक की मेजबानी की। इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लेकर तटीय एवं समुद्री सुरक्षा से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक का उद्घाटन ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक तथा राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक सहित तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य समुद्री सुरक्षा समन्वयक भी उपस्थित रहे।

बैठक में भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व खुफिया निदेशालय तथा सीमा सुरक्षा बल सहित कई केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और मत्स्य पालन मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान समुद्री कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, तटीय निगरानी नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने, खतरनाक एवं हानिकारक पदार्थों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने, तस्करी रोकने के उपायों को मजबूत करने तथा बंदरगाह सुरक्षा बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वय पर जोर

बैठक में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और उभरती चुनौतियों के मद्देनजर भारत की समुद्री एवं तटीय सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि साझा रणनीति और समन्वित प्रयासों से देश की समुद्री सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

समुद्री व्यापार और सुरक्षा व्यापक विकास का प्रवेश द्वार : मुख्यमंत्री

आज लोक सेवा भवन में आयोजित 14वीं मल्टी एजेंसी मैरीटाइम सिक्योरिटी ग्रुप (पॉलिसी) बैठक का उद्घाटन करते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि समुद्र केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि यह अवसरों, समृद्धि और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का प्रवेश द्वार है।

21वीं सदी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सदी

मुख्यमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सदी है और भारत आज विश्व की एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि पहली बार नई दिल्ली से बाहर ओडिशा में इस उच्चस्तरीय राष्ट्रीय बैठक का आयोजन होना कोआपरेटिव फेडेरलिजिम के प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समुद्र, बंदरगाह, मत्स्य संसाधन और ब्लू इकोनॉमी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्तियां

उन्होंने कहा कि देश के समुद्र, बंदरगाह, मत्स्य संसाधन और ब्लू इकोनॉमी भारत की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्तियां हैं। इनकी सुरक्षा केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि आर्थिक विकास और समुद्र पर निर्भर लाखों तटीय लोगों की आजीविका के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में समुद्री सुरक्षा केवल पारंपरिक कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र जागरूकता, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण जैसी अनेक चुनौतियां शामिल हैं।

ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत का उल्लेख किया

ओडिशा की समृद्ध समुद्री विरासत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की लगभग 575 किलोमीटर लंबी तटरेखा बंगाल की खाड़ी के किनारे फैली हुई है। प्राचीन काल में कलिंग के समुद्री व्यापारी दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ व्यापार एवं सांस्कृतिक संबंध स्थापित करते थे, जिसकी जीवंत झलक आज भी बालियात्रा उत्सव में देखने को मिलती है।

समुद्री विकास यात्रा में की ओडिशा महत्वपूर्ण भूमिका

उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री विकास यात्रा में ओडिशा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य की रणनीतिक समुद्री स्थिति को और मजबूत करने के लिए गंजाम में एक गहरे समुद्री बंदरगाह तथा पारादीप के निकट एक शिप बिल्डिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है।

अत्याधुनिक निगरानी नेटवर्क के उपयोग पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा सरकार केंद्र सरकार की ‘सागर’ (सिक्युरिटी एंड ग्रोथ फार आल इन द रिजन ), ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’, बीमस्टेक तथा ‘कोस्टल सिक्योरिटी स्कीम फेज-3’ जैसी प्रगतिशील पहलों का पूर्ण समर्थन करती है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मानव रहित प्रणालियों  और अत्याधुनिक निगरानी नेटवर्क के उपयोग पर विशेष जोर दिया।

समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में निभाई जा रही भूमिका की सराहना की

मुख्यमंत्री ने मछली पकड़ने वाली नौकाओं में ‘नभमित्र’ ट्रांसपोंडर लगाने तथा ‘कोस्टल वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ जैसी योजनाओं को समुद्री सुरक्षा सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल, ओडिशा पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में निभाई जा रही भूमिका की सराहना की।

समुद्री सुरक्षा को व्यापक और रणनीतिक ढांचा की आवश्यकता

बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक (एनएमएससी) वाइस एडमिरल विश्वजीत दासगुप्ता ने कहा कि समुद्री सुरक्षा के लिए किसी एक निश्चित मॉडल को अपनाना संभव नहीं है। इसके लिए विभिन्न मॉडलों को समाहित करते हुए एक व्यापक और रणनीतिक ढांचा तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा कार्यालय समुद्री सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सभी तटीय राज्यों को मार्गदर्शन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

समुद्री सुरक्षा केवल सैन्य या सुरक्षा संबंधी विषय नहीं

इस अवसर पर मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा कि समुद्री सुरक्षा केवल सैन्य या सुरक्षा संबंधी विषय नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि तटीय क्षेत्रों के साथ-साथ समुद्र में स्थित द्वीपों की सुरक्षा और विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए।

सम्मेलन में मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रकाश मिश्र, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हेमंत शर्मा पुलिस महानिदेशक वाईबी खुरानिया, विभिन्न तटीय राज्यों के समुद्री सुरक्षा समन्वयक, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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