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बंगाल में नए मतदाता आवेदन खारिज होने से बढ़ी परेशानी
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चुनाव आयोग के नियमों और जमीनी स्तर की मांगों में अंतर; जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं का सर्टिफिकेट न होने पर लौटाए जा रहे आवेदन
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नए मतदाताओं के पंजीकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई क्षेत्रों में चुनाव अधिकारियों द्वारा नए वोटर कार्ड के लिए आवेदन करने वाले लोगों से जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं कक्षा का प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से मांगा जा रहा है। ऐसे दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर आवेदनों को खारिज किया जा रहा है या लंबित रखा जा रहा है, जिससे हजारों पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर आयु और जन्मतिथि प्रमाणित करने के लिए कई वैकल्पिक दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद कई आवेदकों का दावा है कि फिजिकल सत्यापन के दौरान अधिकारियों द्वारा केवल जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं का प्रमाण पत्र ही स्वीकार करने की बात कही जा रही है।
पीड़ितों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से उन्होंने वोटर कार्ड बनवाने के लिए अनेक प्रयास किए। कई बार आवेदन जमा किए गए, लेकिन न तो उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया और न ही उनके आवेदन आगे बढ़ाए गए। अब जब वे पुनः आवेदन कर रहे हैं, तब उनसे ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो उनके पास उपलब्ध ही नहीं हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तथा कम पढ़े-लिखे लोगों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक हैं जिन्होंने कभी 10वीं की परीक्षा नहीं दी और जिनका जन्म पंजीकरण भी नहीं हुआ था। ऐसे लोगों के लिए जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं का सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना लगभग असंभव है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि चुनाव आयोग द्वारा मान्य अन्य दस्तावेजों को स्वीकार नहीं किया जाता है तो यह बड़ी संख्या में पात्र नागरिकों को उनके संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित करने जैसा होगा। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए ताकि किसी भी योग्य नागरिक को केवल दस्तावेजी जटिलताओं के कारण मतदाता सूची से बाहर न रहना पड़े।
मामला अब चुनावी अधिकारों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच संतुलन का बन गया है। सवाल यह है कि जब चुनाव आयोग स्वयं कई वैकल्पिक दस्तावेजों को मान्यता देता है, तो फिर जमीनी स्तर पर केवल जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं के सर्टिफिकेट की अनिवार्यता क्यों बनाई जा रही है? इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और निगरानी की मांग तेज होती जा रही है।
ऊपरी स्तर पर खारिज हो रहे आवेदन, स्थानीय अधिकारी भी परेशान
मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि निचले स्तर पर आवेदकों द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेज स्वीकार कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे भेजे जा रहे हैं, लेकिन उच्च स्तर पर बड़ी संख्या में आवेदनों को खारिज किया जा रहा है। अधिकारी के अनुसार, कई मामलों में यह कहा जा रहा है कि जिन आवेदकों की आयु 40 वर्ष या उसके आसपास है, उनके लिए जन्म प्रमाण पत्र अथवा 10वीं कक्षा का प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा। इससे स्थानीय स्तर पर भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है, क्योंकि चुनाव आयोग की ओर से मान्य अन्य दस्तावेज होने के बावजूद आवेदनों को मंजूरी नहीं मिल रही है।
आधार, पैन और पासपोर्ट भी नहीं आ रहे काम
सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हो रही है जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है और जिन्होंने कभी 10वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी नहीं की। ऐसे आवेदकों के पास पहचान और आयु संबंधी प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट तथा अन्य सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं, फिर भी उनके आवेदन अटक रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों का मानना है कि ऊपरी स्तर पर अपनाई जा रही कठोर और कथित रूप से तुगलकी कार्यप्रणाली के कारण पात्र नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे न केवल मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि कई लोगों के संवैधानिक मतदान अधिकार पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है।
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