लेखिका: श्रीमती प्रभाती परिडा, उपमुख्यमंत्री, ओडिशा
एक समय था जब महिलाओं के सपने घर की चारदीवारी तक सीमित रह जाते थे। आज वही महिलाएं अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने के लिए आगे बढ़ रही हैं। रसोई की चौखट से लेकर अंतरिक्ष की सीमाओं तक, भारतीय महिलाओं की यात्रा हमारे बदलते राष्ट्र की कहानी है। ओडिशा में यह परिवर्तन सुभद्रा योजना के माध्यम से एक सशक्त अभिव्यक्ति पा रहा है। यह पल केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और आकांक्षाओं को सशक्त बनाने का प्रयास है।
आशा, सम्मान और अवसर की यात्रा का प्रतीक
17 सितंबर हमारे लिए केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। सुभद्रा योजना के दूसरे वर्ष में प्रवेश का यह अवसर ओडिशा की लगभग 1.03 करोड़ महिलाओं के लिए आशा, सम्मान और अवसर की यात्रा का प्रतीक है। पांच वर्षों में 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता के संकल्प के साथ यह योजना अनगिनत परिवारों की आर्थिक नींव को मजबूत कर रहा है। लेकिन किसी भी कल्याणकारी योजना की वास्तविक सफलता केवल धनराशि के हस्तांतरण में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आने वाले परिवर्तन में निहित होता है।
परिवर्तन की एक उत्साहजनक तस्वीर
सुभद्रा योजना की समीक्षा से इस परिवर्तन की एक उत्साहजनक तस्वीर सामने अता है। 22,000 से अधिक लाभार्थियों के साथ हुए संवादों के आधार पर, प्रारंभिक और बाद के किस्त आकलनों के बीच कौशल विकास में रुचि व्यक्त करने वाली महिलाओं का अनुपात 12 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत होने की बात सामने आई है।
यह केवल एक आंकड़ा नहीं है। यह महिलाओं में स्वयं को सशक्त बनाने, नए कौशल सीखने और अधिक सुरक्षित भविष्य का निर्माण करने की बढ़ती इच्छा को दर्शाता है।
सहायता आर्थिक सशक्तीकरण की मजबूत नींव
आईआईएम संबलपुर के निष्कर्षों के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं सुभद्रा की राशि का उपयोग दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के लिए कर रही हैं, जबकि 25.52 प्रतिशत महिलाओं ने छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं। अनुसूचित जाति की महिलाओं में यह आंकड़ा 30.25 प्रतिशत बताया गया है। एसबीआई रिसर्च ने भी लाभार्थियों के मासिक बैंक खाते के शेष और क्रय शक्ति में वृद्धि की जानकारी दी है। ये निष्कर्ष एक महत्वपूर्ण संभावना की ओर संकेत करते हैं कि जब महिलाओं को आर्थिक सहायता के साथ आत्मविश्वास और अवसर मिलते हैं, तो यही सहायता आर्थिक सशक्तीकरण की मजबूत नींव बन सकता है।
सुभद्रा का अगला अध्याय होगा शुरू
फिर भी, हमारी जिम्मेदारी यहीं समाप्त नहीं होती। सुभद्रा का अगला अध्याय, धन को कौशल से, कौशल को बाजार से और बाजार को टिकाऊ आय से जोड़ने, का होना चाहिए। जो महिलाएं अपना व्यवसाय शुरू करना या उसका विस्तार करना चाहती हैं, उन्हें प्रशिक्षण, डिजिटल बैंकिंग, ऋण, तकनीक और विश्वसनीय बाजारों तक पहुँच की आवश्यकता है। हमारे स्वयं सहायता समूह और उनके महासंघ अवसरों का ऐसा सशक्त तंत्र तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
समुदाय को सशक्त बनाती है आत्मनिर्भर महिला
जब एक महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती है, तो वह अपने परिवार को मजबूत करती है। जब वह दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करती है, तो वह अपने समुदाय को सशक्त बनाती है। और जब लाखों महिलाएँ एक साथ आगे बढ़ती हैं, तो वे राष्ट्र को मजबूत करती हैं। यही महिला-नेतृत्व वाले विकास का व्यापक दृष्टिकोण है।
यात्रा को नए संकल्प और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ाएं
17 सितंबर को जब हम ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाएं, तो उसकी लौ आशा, सेवा और स्वावलंबन का प्रतीक बने। वह हमें याद दिलाए कि हर महिला को सपने देखने, निर्णय लेने और उन्हें साकार करने का अवसर मिलना चाहिए।
सुभद्रा केवल एक योजना नहीं है। यह ओडिशा की महिलाओं के सम्मान और आकांक्षाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है।
आइए, हम इस यात्रा को नए संकल्प और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ाएं।
आइए, हम आत्मनिर्भर महिलाओं, आत्मनिर्भर ओडिशा और मिलकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करें।
मां सुभद्रा के आशीर्वाद और हमारी महिलाओं के नेतृत्व में ओडिशा आगे बढ़ेगा, और भारत भी आगे बढ़ेगा।
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