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कोरापुट के एईई की संपत्तियों पर विजिलेंस का छापा

  •     फ्लैट, फार्महाउस, 32 प्लॉट, नकदी और सोने के आभूषण मिले

  •     सहायक कार्यपालक अभियंता सत्यनारायण सेठी की आय से अधिक संपत्ति की जांच तेज

  •     निवेश और बैंक खातों की भी पड़ताल

भुवनेश्वर। ओडिशा विजिलेंस ने कोरापुट जिले के कोटपाड़ ब्लॉक में कार्यरत सहायक कार्यपालक अभियंता (एईई) सत्यनारायण सेठी से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में चल-अचल संपत्ति का पता लगाया है। जांच के दौरान फ्लैट, फार्महाउस, दर्जनों भूखंड, नकदी और सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, सेठी और उनके परिवार के सदस्यों की संपत्तियों का मूल्यांकन तथा वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच जारी है।

विजिलेंस की जांच में खोर्धा जिले के जटनी स्थित हाई-टेक प्लाजा में लगभग 1000 वर्ग फुट क्षेत्रफल का एक दो बेडरूम वाला फ्लैट मिला है। इसके अलावा कोरापुट जिले के बोरिगुमा तहसील अंतर्गत तरागांव में दो बड़े फार्महाउस भी पाए गए हैं।

पहला फार्महाउस करीब 10.03 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां आम और यूकेलिप्टस के पौधों की खेती की गई है। दूसरा फार्महाउस 4.35 एकड़ भूमि पर विकसित किया गया है, जिसमें नीलगिरी के पौधे लगाए गए हैं।

32 मूल्यवान प्लॉटों का पता चला

जांच के दौरान विजिलेंस टीम ने जयंपुर, कोरापुट, बोरिगुमा, कोटपाड़ और पाटांगी तहसीलों में कुल 32 मूल्यवान प्लॉटों की पहचान की है। विजिलेंस के तकनीकी विंग के अधिकारी इन भूखंडों का मापन और बाजार मूल्य का आकलन कर रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि इन संपत्तियों के वास्तविक मूल्यांकन के बाद सेठी की कुल संपत्ति का स्पष्ट आंकड़ा सामने आ सकेगा।

नकदी और सोने के आभूषण भी बरामद

छापेमारी के दौरान 5.48 लाख रुपये नकद और लगभग 300 ग्राम सोने के आभूषण भी बरामद किए गए हैं। इसके अलावा बैंक जमा, डाकघर बचत योजनाओं और अन्य वित्तीय निवेशों की भी जांच की जा रही है।

विजिलेंस अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न दस्तावेजों, बैंक खातों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि सेठी और उनके परिवार के नाम पर कितनी संपत्ति अर्जित की गई है और उसका स्रोत क्या है।

1998 में जूनियर इंजीनियर के रूप में शुरू किया था करियर

सत्यनारायण सेठी ने 22 जनवरी 1998 को कोरापुट के अंबागुड़ा स्थित अपर कोलाब डिवीजन में जूनियर इंजीनियर के रूप में सरकारी सेवा शुरू की थी। उस समय उनका प्रारंभिक वेतन 7,100 रुपये था।

उसी वर्ष अक्टूबर में उनका तबादला नवरंगपुर जिले के झरिगांव ब्लॉक में हुआ। बाद में उन्होंने चंदाहांडी ब्लॉक और आईटीडीए जयंपुर में भी जूनियर इंजीनियर के रूप में कार्य किया।

29 जुलाई 2015 को उन्हें पदोन्नत कर सहायक अभियंता बनाया गया और कोटपाड़ ब्लॉक में नियुक्त किया गया। जून 2020 में उनका तबादला बोरिगुमा ब्लॉक हुआ। इसके बाद 3 सितंबर 2025 को उन्हें सहायक कार्यपालक अभियंता (एईई) के पद पर पदोन्नति मिली और उन्हें पुनः कोटपाड़ ब्लॉक में पदस्थापित किया गया, जहां वे वर्तमान में कार्यरत हैं।

जांच जारीबढ़ सकती है संपत्तियों की सूची

विजिलेंस विभाग ने कहा है कि तलाशी अभियान अभी जारी है और संपत्तियों के मूल्यांकन तथा वित्तीय दस्तावेजों के सत्यापन के बाद और भी जानकारी सामने आ सकती है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि बरामद संपत्तियां आय के ज्ञात स्रोतों के अनुरूप हैं या नहीं।

प्रारंभिक जांच में सामने आई संपत्तियों की मात्रा को देखते हुए यह मामला हाल के दिनों में विजिलेंस की प्रमुख कार्रवाईयों में से एक माना जा रहा है।

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