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हर पंचायत में तैनात होंगे सामुदायिक लाइफगार्ड
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पांच वर्षों में करीब 9 हजार लोगों की मौत के बाद सरकार की व्यापक कार्ययोजना
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युवाओं को सिखाई जाएगी तैराकी
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य में डूबने से होने वाली मौतों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए व्यापक और बहु-विभागीय अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत हर पंचायत में सामुदायिक लाइफगार्ड तैनात किए जाएंगे। नदियों, नहरों, तालाबों, जलाशयों और समुद्री तटीय क्षेत्रों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा उपायों को मिशन मोड में लागू करने की तैयारी की है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में राज्य में डूबने की घटनाओं में लगभग 9,000 लोगों की जान गई है। इनमें बड़ी संख्या बच्चों और युवाओं की रही है। इन चिंताजनक आंकड़ों को देखते हुए मुख्य सचिव अनु गर्ग ने लोक सेवा भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर संबंधित विभागों को डूबने से होने वाली मौतों की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
डूबने वाले ब्लैक स्पॉट की होगी पहचान
नई कार्ययोजना के तहत प्रत्येक जिले में उन जलाशयों, नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों की पहचान की जाएगी जहां डूबने की घटनाएं अधिक होती हैं। इन स्थानों को “डूबने की आशंका वाले ब्लैक स्पॉट” के रूप में चिह्नित कर वहां विशेष सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान और समय पर हस्तक्षेप से बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
हर ग्राम पंचायत में प्रशिक्षित होंगे लाइफगार्ड
राज्य सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक से दो स्थानीय युवाओं को लाइफगार्ड के रूप में प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया है। आपात स्थिति में ये प्रशिक्षित स्वयंसेवक तत्काल बचाव कार्य कर सकेंगे और दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को कम करने में मदद करेंगे।
खतरनाक स्थानों पर लगेंगे सुरक्षा इंतजाम
डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा रेलिंग, बैरिकेड, तैरते सुरक्षा उपकरण (बॉय) और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं स्थापित की जाएंगी। खुले कुओं को सुरक्षा जाल से ढका जाएगा ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सके।
समुद्र तटों पर बनेगा सुरक्षित स्नान क्षेत्र
पुरी सहित राज्य के लोकप्रिय समुद्र तटों पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे। सुरक्षित स्नान क्षेत्रों को रस्सियों और तैरते संकेतकों की सहायता से अलग चिन्हित किया जाएगा।
सरकार अन्य राज्यों और देशों में अपनाई जा रही सफल व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें ओडिशा में भी लागू करने की योजना बना रही है।
तैराकी को बनाया जाएगा जीवन रक्षक कौशल
डूबने की घटनाओं को कम करने के लिए राज्यभर में छात्रों और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर तैराकी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में तैराकी प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा ताकि लोगों में जल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़े।
सरकार का मानना है कि तैराकी केवल खेल नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाला महत्वपूर्ण कौशल है।
एनसीसी और युवा संगठनों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
कार्ययोजना के तहत एनसीसी, सिविल डिफेंस, युवा संगठनों और स्वयंसेवी समूहों को जल बचाव एवं प्राथमिक उपचार का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे आपदा या दुर्घटना की स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
कई विभाग मिलकर चलाएंगे अभियान
इस अभियान के क्रियान्वयन में अग्निशमन सेवा, पुलिस, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, पंचायती राज तथा अन्य विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। रामचंडी के निकट स्थित ओडिशा स्टेट वाटरमैनशिप एंड लाइफगार्ड इंस्टीट्यूट (ओएसडब्ल्यूएएलआई) प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने जताई चिंता
अग्निशमन सेवा महानिदेशक डॉ सुधांशु षाड़ंगी ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने डूबने की घटनाओं में लगातार हो रही मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है और प्रभावी रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि सरकार, स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से डूबने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
जागरूकता और सुरक्षा से बचेंगी हजारों जानें
सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में जागरूकता, बेहतर तैयारी, आधुनिक सुरक्षा ढांचे और त्वरित बचाव व्यवस्था के माध्यम से डूबने से होने वाली मौतों में बड़ी कमी लाना है। राज्य सरकार का मानना है कि समय पर सतर्कता और सामुदायिक भागीदारी के जरिए हजारों बहुमूल्य जीवन बचाए जा सकते हैं।
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