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ओडिशा अर्बन रेंट कंट्रोल एक्ट-2026 के तहत नया कानून
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हर रेंट एग्रीमेंट का 60 दिनों में ऑनलाइन करना होगा पंजीकरण
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1967 का पुराना कानून होगा समाप्त
भुवनेश्वर। ओडिशा में किराये के मकानों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रस्तावित ओडिशा अर्बन रेंट कंट्रोल एक्ट-2026 के तहत अब बिना लिखित रेंट एग्रीमेंट के मकान किराये पर नहीं दिया जा सकेगा। साथ ही हर रेंट एग्रीमेंट का हस्ताक्षर के 60 दिनों के भीतर ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य होगा। नया कानून लागू होने के बाद 1967 का पुराना हाउस रेंट कंट्रोल कानून समाप्त हो जाएगा, जिससे किरायेदारी व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आने की उम्मीद है।
ओडिशा सरकार ने शहरी क्षेत्रों में किरायेदारी व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रस्तावित ओडिशा अर्बन रेंट कंट्रोल एक्ट, 2026 का मसौदा जारी किया है। यह नया कानून 59 वर्ष पुराने हाउस रेंट कंट्रोल एक्ट, 1967 की जगह लेगा और मकान मालिकों तथा किरायेदारों के बीच होने वाले विवादों को कम करने के साथ-साथ दोनों पक्षों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
मौखिक रेंट एग्रीमेंट पूरी तरह प्रतिबंधित
प्रस्तावित कानून के तहत अब मौखिक किरायेदारी समझौते पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे। प्रत्येक मकान मालिक और किरायेदार को लिखित किरायेदारी अनुबंध करना होगा, जिसे हस्ताक्षर के 60 दिनों के भीतर रेंट अथॉरिटी और स्थानीय पुलिस थाने में पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा।
डिजिटल ऑनलाइन पोर्टल होगा शुरू
इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए राज्य सरकार एक डिजिटल ऑनलाइन पोर्टल शुरू करेगी, जहां किरायेदारी समझौतों का पंजीकरण और रिकॉर्ड का प्रबंधन पूरी तरह ऑनलाइन किया जा सकेगा। इससे दस्तावेजों की पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध रहेंगे।
कानून की प्रमुख विशेषताएं
– सभी किरायेदारी के लिए लिखित अनुबंध अनिवार्य होगा, मौखिक समझौते मान्य नहीं होंगे।
– समझौते पर हस्ताक्षर के 60 दिनों के भीतर उसका पंजीकरण कराना होगा।
– पंजीकरण और निगरानी के लिए ऑनलाइन डिजिटल पोर्टल उपलब्ध कराया जाएगा।
– किराये की राशि तय करने या बढ़ाने में सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी।
– मकान मालिक और किरायेदार आपसी सहमति से किराया और उसकी शर्तें तय कर सकेंगे।
विधेयक भारत सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट की तर्ज पर तैयार
यह विधेयक भारत सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट की तर्ज पर तैयार किया गया है। आवास एवं शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी ने इस मसौदे पर आम जनता, मकान मालिकों, किरायेदारों, विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं, ताकि अंतिम कानून को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
काले धन के लेन-देन पर रोक लगेगी
राज्य सरकार का मानना है कि भुवनेश्वर, कटक और राउरकेला जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में बढ़ती किराये की मांग को देखते हुए यह नई व्यवस्था काले धन के लेन-देन पर रोक लगाने, वास्तविक किरायेदारों को मनमाने ढंग से बेदखल किए जाने से बचाने और मकान मालिकों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रस्तावित कानून पर अपने सुझाव शीघ्र भेजें
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रस्तावित कानून पर अपने सुझाव शीघ्र भेजें, ताकि व्यापक जनभागीदारी के साथ एक संतुलित और प्रभावी किरायेदारी कानून लागू किया जा सके।
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