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5 दिन में प्रमाणपत्र जमा करने का अल्टीमेटम
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निर्धारित समय में नवीनीकरण नहीं कराने पर गिरेगी गाज
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आयुष्मान भारत-गोपबंधु जन आरोग्य योजना से हटाए जाएंगे अस्पताल
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मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं: स्वास्थ्य विभाग
भुवनेश्वर। मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ओडिशा राज्य स्वास्थ्य आश्वासन सोसाइटी ने राज्य के 35 सरकारी और निजी अस्पतालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इन अस्पतालों के अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त हो चुकी है, लेकिन अब तक उन्होंने अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) का नवीनीकरण नहीं कराया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत कार्यरत ओडिशा राज्य स्वास्थ्य आश्वासन सोसाइटी ने सभी संबंधित अस्पतालों को पांच दिनों के भीतर नवीनीकृत फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र जमा करने का निर्देश दिया है। निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं करने पर उन्हें आयुष्मान भारत-गोपबंधु जन आरोग्य योजना के पैनल से तत्काल हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
राज्य स्वास्थ्य आश्वासन सोसाइटी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ वृंदा डी ने जारी निर्देश में स्पष्ट कहा है कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों को तय समय के भीतर फायर एनओसी का नवीनीकरण कर उसका प्रमाण प्रस्तुत करना होगा, अन्यथा डी-एम्पैनलमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
कई जिलों के अस्पताल सूची में शामिल
जिन 35 अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है, वे राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित हैं। इनमें सबसे अधिक 15 अस्पताल कटक (ग्रामीण एवं शहरी) क्षेत्र के हैं, जबकि खुर्दा (ग्रामीण एवं शहरी) के 10 अस्पताल सूची में शामिल हैं।
इसके अलावा अनुगूल, गंजाम और पुरी के दो-दो अस्पतालों को नोटिस भेजी गई है। वहीं बालेश्वर, भद्रक, रायगड़ा और संबलपुर के एक-एक अस्पताल भी इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
आयुष्मान योजना पर पड़ सकता है असर
यदि संबंधित अस्पताल निर्धारित समय में फायर सुरक्षा प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं करते हैं और उन्हें योजना से बाहर किया जाता है, तो आयुष्मान भारत-गोपबंधु जन आरोग्य योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा लेने वाले हजारों मरीज प्रभावित हो सकते हैं। राज्य सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दे रही है और ऐसे में किसी भी अस्पताल का निलंबन स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
समयसीमा पर नजर, आगे होगी कड़ी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने डिफॉल्टर अस्पतालों से जल्द से जल्द आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने की अपील की है ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा के बाद अनुपालन की समीक्षा की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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