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बोले- मोदी के विकसित भारत विजन से प्रभावित
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नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में ली सदस्यता
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संगठन में उपेक्षा का लगाया आरोप
भुवनेश्वर। पूर्व राज्यसभा सांसद देवाशीष सामंतराय ने बीजू जनता दल छोड़ने के एक दिन बाद भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्होंने नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी का दामन थामा।
इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, ओडिशा भाजपा प्रभारी विजय पाल सिंह तोमर और ओडिशा भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल मौजूद रहे।
भाजपा में शामिल होने के बाद सामंतराय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि वे उनके विकसित भारत के विजन से काफी प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाकर देश के विकास के लिए काम करने का अवसर दिया है। सामंतराय ने कहा कि मोदी लगातार विकसित भारत के निर्माण की दिशा में कार्य कर रहे हैं और उनके कार्यक्रमों तथा व्यक्तित्व ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भाजपा नेतृत्व और कार्यकर्ताओं का सहयोग उन्हें आगे भी मिलता रहेगा और वे ओडिशा में पार्टी के लिए व्यापक स्तर पर काम करेंगे।
बीजद में उपेक्षा का आरोप लगाकर दिया था इस्तीफा
सामंतराय का भाजपा में जाना ऐसे समय हुआ है जब उन्होंने एक दिन पहले ही बीजद की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी में उन्हें व्यवस्थित तरीके से कमजोर और अपमानित किया जा रहा था।
बीजद छोड़ने के बाद उन्होंने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात कर राज्यसभा सदस्य पद से भी इस्तीफा सौंप दिया।
नवीन पटनायक को लिखे पत्र में जताई नाराजगी
बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक को लिखे अपने इस्तीफे पत्र में सामंतराय ने कहा कि वे हमेशा पार्टी और जनता के हित में पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहे, लेकिन हाल के दिनों में उन्हें लगातार नजरअंदाज किया गया। उन्होंने पत्र में लिखा कि राज्यसभा भेजने और अविभाजित कटक जिले की जनता की सेवा करने का अवसर देने के लिए वे नवीन पटनायक के आभारी रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी में अब उनकी सेवाओं की जरूरत महसूस नहीं की जा रही थी, इसलिए उन्होंने सार्वजनिक हित में यह कठिन फैसला लिया।
पार्टी के अंदरूनी कामकाज पर भी उठाए सवाल
सामंतराय ने बीजद के अंदरूनी कामकाज और संगठनात्मक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन को मजबूत करने के बजाय वरिष्ठ नेताओं को किनारे लगाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पिछले कुछ महीनों से पार्टी के कई निर्णयों पर असंतोष भी जाहिर किया था। नवंबर 2025 में उन्होंने बीजद वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उस समय उन्होंने पार्टी में नौकरशाही शैली के बढ़ते प्रभाव और वैचारिक बदलाव पर सवाल उठाए थे।
वीके पांडियन पर भी साधा था निशाना
सामंतराय ने पूर्व नौकरशाह और नवीन पटनायक के करीबी सहयोगी वीके पांडियन पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि वक्फ विधेयक पर पार्टी के रुख में अचानक बदलाव के पीछे पांडियन की भूमिका थी। राज्यसभा में वक्फ विधेयक पर मतदान के दौरान सामंतराय अनुपस्थित रहे थे, जिसके बाद उनके असंतोष की चर्चा और तेज हो गई थी।
बीजद के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा फैसला
अनुभवी नेता सामंतराय फरवरी 2024 में बीजद उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। इससे पहले वे 2009 और 2014 में बाराबती-कटक विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुके हैं। उनके भाजपा में शामिल होने को बीजद के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। ओडिशा विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी लगातार अंदरूनी असंतोष और नेताओं के पलायन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
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