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ओडिशा में पेट्रोल पंपों पर कम हुई भीड़

  •     पैनिक खरीदारी से बिगड़ी थी स्थिति

  •     सरकार ने रविवार को भी चालू रखे चार बड़े डिपो

  •     सोमवार शाम तक सामान्य होने की उम्मीद

भुवनेश्वर। ओडिशा में पेट्रोल और डीजल की घबराहट में हुई खरीदारी के कारण पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें अब धीरे-धीरे कम होने लगी हैं। राज्य सरकार ने स्थिति को सामान्य करने के लिए तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को रविवार को भी चार प्रमुख ईंधन डिपो चालू रखने का निर्देश दिया है। जटनी, बालेश्वर, पारादीप और खुर्दा स्थित डिपो, जो सामान्य तौर पर रविवार को बंद रहते हैं, अब ईंधन लोडिंग और परिवहन के लिए खुले रखे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार रविवार को 650 से अधिक टैंकरों के जरिए विभिन्न जिलों में ईंधन पहुंचाया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार शाम तक राज्य के लगभग 2,800 से 2,850 पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त ईंधन उपलब्ध हो जाएगा।

भुवनेश्वर में सुधर रही स्थिति

राजधानी भुवनेश्वर में हालात पहले की तुलना में काफी बेहतर हुए हैं। हालांकि कुछ पेट्रोल पंपों पर रविवार को भी हल्की भीड़ देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव और हाल ही में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की अफवाहों के बाद लोगों ने बड़ी मात्रा में ईंधन भरवाना शुरू कर दिया था।

एक पेट्रोल पंप कर्मचारी ने कहा कि लोगों ने जितना पेट्रोल-डीजल भरवा लिया है, उसे खत्म होने में कई दिन लगेंगे। यह कोई खाने की चीज तो है नहीं कि एक रात में खत्म हो जाए।

सरकार ने कृत्रिम संकट बताया

खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण मंत्री कृष्ण चंद्र पात्र ने ओएमसी प्रतिनिधियों और डीलरों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह संकट कृत्रिम है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन संरक्षण की अपील की गलत व्याख्या और कीमत बढ़ने की अफवाहों के कारण पैदा हुआ।

ओडिशा में 13 दिनों का ईंधन भंडार उपलब्ध

मंत्री ने कहा कि ओडिशा में 13 दिनों का ईंधन भंडार उपलब्ध है और पारादीप रिफाइनरी से भी आपूर्ति जारी है। उन्होंने लोगों से जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदने की अपील की। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक कमल शील ने भी स्पष्ट किया कि राज्य में ईंधन की कोई वास्तविक कमी नहीं है और वितरण व्यवस्था को सामान्य बनाने के लिए छुट्टी के दिन भी काम जारी है।

50 प्रतिशत तक बढ़ी मांग, कई पंपों का स्टॉक खत्म

पिछले कुछ दिनों में घबराहट के कारण पेट्रोल और डीजल की बिक्री में 37 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके चलते 200 से 300 पेट्रोल पंपों पर अस्थायी रूप से ईंधन खत्म हो गया, जबकि कई अन्य पंपों में स्टॉक काफी कम हो गया।

स्थिति का सबसे अधिक असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ा

इस स्थिति का सबसे अधिक असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ा। ओडिशा स्टेट ट्रक ओनर्स फेडरेशन के अनुसार, 1.5 लाख से अधिक निजी ट्रकों का संचालन प्रभावित हुआ है। वहीं ऑल ओडिशा प्राइवेट बस ओनर्स एसोसिएशन ने कहा कि लगभग 2,000 से 2,800 बसें विशेष पेट्रोल पंपों पर निर्भर हैं और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ईंधन उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

मछुआरों, कैब चालकों और मरीजों पर असर

ईंधन संकट की अफवाहों का असर कैब चालकों, गिग वर्करों, दिहाड़ी मजदूरों और मछुआरों पर भी पड़ा। कई लोगों ने घंटों लाइन में लगने के कारण आय प्रभावित होने की बात कही। चिल्का झील और पुरी, बालेश्वर तथा केंद्रापड़ा जैसे तटीय इलाकों में कई मछुआरे नाव नहीं चला सके। इसी बीच एक दुखद घटना में 27 वर्षीय मरीज की एंबुलेंस में ईंधन खत्म होने के कारण मौत हो गई।

राइड शेयरिंग को बढ़ावा देने की सलाह

स्थिति को देखते हुए आवास एवं शहरी विकास विभाग ने वाहन साझा करने और राइड शेयरिंग को बढ़ावा देने की सलाह दी है। कई जिलों में प्रशासन और पुलिस पेट्रोल पंपों पर औचक निरीक्षण कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर बाइक चालकों को 200 रुपये तक का ही ईंधन देने की सीमा भी तय की गई है।

अनावश्यक भंडारण से बचने की अपील

सरकार और तेल कंपनियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और अनावश्यक भंडारण से बचने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि आपूर्ति व्यवस्था मजबूत की जा रही है और कई इलाकों में स्थिति पहले ही सामान्य होने लगी है।

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