-
बीजेडी सांसद सस्मित पात्र का केंद्र को पत्र
-
जीएसटी लागू होने पर पेट्रोल 25 रुपये और डीजल 14 रुपये सस्ता होने का दावा
भुवनेश्वर। बीजेडी सांसद सस्मित पात्र ने पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में शामिल करने की मांग उठाते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है। उन्होंने अगली जीएसटी परिषद बैठक के एजेंडे में इस मुद्दे को औपचारिक रूप से शामिल करने का आग्रह किया है।
अपने पत्र में सस्मित पात्र ने संविधान के अनुच्छेद 279ए(5) का हवाला देते हुए कहा कि जीएसटी परिषद को पेट्रोलियम उत्पादों पर जीएसटी लागू करने की तिथि तय करने का अधिकार है। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में पेट्रोल और डीजल को जीएसटी से बाहर रखने के कारण राज्यों के बीच कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
ओडिशा में पेट्रोल 101-102 रुपये, डीजल 92-94 रुपये प्रति लीटर
सांसद ने बताया कि ओडिशा में पेट्रोल पर 28 प्रतिशत और डीजल पर 24 प्रतिशत वैट लगाया जा रहा है। इसके कारण राज्य में पेट्रोल की खुदरा कीमत 101 से 102 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 92 से 94 रुपये प्रति लीटर के बीच बनी हुई है।
उन्होंने 28 प्रतिशत जीएसटी दर के एक संभावित मॉडल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि यदि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो पेट्रोल लगभग 25 रुपये प्रति लीटर और डीजल करीब 14 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हो सकता है।
मध्यम वर्ग, किसान और उद्योगों को राहत का दावा
सस्मित पात्र ने कहा कि एक मध्यमवर्गीय परिवार यदि हर महीने 60 लीटर पेट्रोल का उपयोग करता है तो उसे करीब 1,500 रुपये की मासिक बचत हो सकती है। इससे सालाना बचत 18 हजार से 19 हजार रुपये तक पहुंच सकती है।
उन्होंने कहा कि डीजल पर निर्भर किसान और उद्योगों को भी कम परिवहन और उत्पादन लागत का लाभ मिलेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
राजस्व नुकसान की चिंता भी जताई
हालांकि सांसद ने इस कदम से होने वाले संभावित राजस्व नुकसान को भी स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि ओडिशा सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट से हर साल लगभग 9,700 करोड़ रुपये की आय होती है, जबकि ओडिशा में खपत के आधार पर केंद्र सरकार को मिलने वाला उत्पाद शुल्क करीब 5,500 से 6,000 करोड़ रुपये है।
उनका कहना है कि जीएसटी लागू होने पर ओडिशा को लगभग 4,500 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार को करीब 3,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
चरणबद्ध लागू करने का सुझाव
सस्मित पात्र ने इस समस्या के समाधान के लिए चरणबद्ध तरीके से जीएसटी लागू करने, राज्यों को अंतरिम मुआवजा देने और संतुलित जीएसटी दर संरचना तैयार करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर व्यवस्थित चर्चा से सहकारी संघवाद को मजबूती मिलेगी और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में भी सुधार होगा।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
