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कवि श्री कृष्ण जगद्देव की पुस्तक ‘कविता कुसुमांजलि’ का लोकार्पण

  •     कविता संग्रह में भक्ति और सामाजिक संवेदनशीलता का अद्भुत समन्वय : धर्मेंद्र प्रधान

भुवनेश्वर। ओड़िया साहित्य, संस्कृति और अस्मिता की पवित्र धरती पुरी में पावन ‘सावित्री अमावस्या’ के अवसर पर प्रख्यात कवि एवं स्तंभकार कृष्णचंद्र जगदेव की नई काव्य कृति ‘कविता कुसुमांजलि’ का भव्य लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने पुस्तक का विमोचन करते हुए कवि एवं प्रकाशकों को शुभकामनाएं दीं।

पुरी में आयोजित अपने संबोधन में प्रधान ने कहा कि ‘कविता कुसुमांजलि’ केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि भक्ति, समाज और राष्ट्रप्रेम का एक जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि इस काव्य संग्रह में भगवान के प्रति समर्पण के साथ-साथ सामाजिक संवेदनशीलता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

केंद्रीय मंत्री ने कृष्णचंद्र जगदेव को बहुमुखी प्रतिभा का धनी बताते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व में उत्कलमणि गोपबंधु दास के संस्कार और पुरी की सांस्कृतिक चेतना समाहित है। उन्होंने कहा कि कृष्ण जगद्देव संघ परिवार के एक समर्पित प्रचारक और भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता रहे हैं, जिन्होंने अपना जीवन समाज सेवा और जनकल्याण को समर्पित किया है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जुड़ी एक पुरानी स्मृति साझा करते हुए बताया कि आपातकाल के दौरान इतिहास संकलन के कार्य हेतु मोदी जी ओडिशा आए थे। उस समय पुरी में कार्यालय बंद होने के कारण वे कृष्ण जगद्देव के स्कूटर पर बैठकर उनके गांव गए थे। बाद में प्रधानमंत्री बनने के पश्चात भी श्री मोदी ने सार्वजनिक कार्यक्रम में अपने पुराने सहयोगी को पहचानकर स्नेहपूर्वक संबोधित किया, जो उनके आत्मीय संबंध और सम्मान को दर्शाता है।

सांस्कृतिक चेतना पर प्रकाश डालते हुए धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि वर्ष 2026 भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लगभग 1000 वर्ष पूर्व 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण के बाद देश ने जो आत्मविश्वास खोया था, आज भगवान सोमनाथ और महाप्रभु जगन्नाथ के आशीर्वाद से भारत पुनः सांस्कृतिक जागरण के नए युग में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि यही सांस्कृतिक चेतना ‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के निर्माण की आधारशिला बनेगी।

इससे पूर्व केंद्रीय मंत्री ने गोपबंधु आयुर्वेदिक महाविद्यालय परिसर में उत्कलमणि गोपबंधु दास की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गोपबंधु दास का त्याग, सेवा और आदर्श सदैव समाज को प्रेरित करते रहेंगे।

कार्यक्रम के अंत में प्रधान ने साहित्यकारों द्वारा भेंट की गई पुस्तकों के लिए आभार व्यक्त करते हुए महाप्रभु जगन्नाथ से कृष्णचंद्र जगदेव के दीर्घायु जीवन और ‘कविता कुसुमांजलि’ की व्यापक सफलता की कामना की।

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