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गजपति जिला में करियर परामर्श आयोजित
गजपति। जिला बाल संरक्षण इकाई, गजपति द्वारा आयोजित “भविष्य गठन” करियर काउंसलिंग कार्यक्रम जिला कलेक्टर कार्यालय के सभा कक्ष संख्या-4 में अत्यंत प्रेरणादायक माहौल में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 10वीं कक्षा उत्तीर्ण माता-पिता विहीन बच्चों को आत्मविश्वास प्रदान करना और उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में सही मार्गदर्शन देना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ गजपति जिले के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (सामान्य) फाल्गुनी माझी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर जिला आपातकालीन अधिकारी विनायक राउल, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अमीय त्रिपाठी, जिला संस्कृति अधिकारी अर्चना मंगराज, जिला पर्यटन अधिकारी एच संग्राम, जिला नियोजन अधिकारी सौभाग्य स्मृति रंजन त्रिपाठी सहित कई गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में 85 छात्र-छात्रियों ने भाग लिया, जिनमें विभिन्न बाल देखभाल संस्थानों से 36, आशीर्वाद हिताधिकारियों में से 41 तथा हाल ही में चिन्हित माता-पिता विहीन बच्चों में से 42 शामिल थे। ये बच्चे गुम्मा, काशीनगर, रायगड़ा, नुआगढ़ ब्लॉक और पारलाखेमुंडी नगरपालिका से आए थे।
कार्यक्रम में होटल प्रबंधन, खानपान प्रौद्योगिकी एवं अनुप्रयुक्त पोषण संस्थान (आईएचएम), भुवनेश्वर के प्रतिनिधि अविनाश दाश एवं संतोष कुमार बेहरा की गरिमामयी उपस्थिति रही। अविनाश दाश ने छात्र-छात्रियों को होटल प्रबंधन शिक्षा की वर्तमान मांग, अपार करियर संभावनाओं तथा आतिथ्य उद्योग के उज्ज्वल भविष्य के बारे में प्रेरणादायी बातें आत्मीय भाव से साझा कीं। आईएचएम भुवनेश्वर ने इन वंचित मेधावी बच्चों के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि हमारा प्रयास है कि कोई भी मेधावी बच्चा आर्थिक या पारिवारिक अभाव के कारण अपने सपनों से वंचित न रहे। हम इन्हें न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बल्कि आत्मनिर्भर और सफल भविष्य भी प्रदान करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं।
सभी अतिथियों ने अपनी व्यक्तिगत संघर्ष एवं सफलता की कहानियां साझा कर बच्चों में आत्मविश्वास का संचार किया और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री अरुण कुमार त्रिपाठी ने किया। चाइल्ड हेल्पलाइन एवं जिला बाल संरक्षण इकाई के समस्त कर्मचारियों ने पूरे कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
यह कार्यक्रम माता-पिता विहीन बच्चों के सशक्तिकरण की दिशा में जिला प्रशासन और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय का एक सुंदर उदाहरण साबित हुआ। आईएचएम भुवनेश्वर जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी ऐसे कार्यक्रमों को और भी अर्थपूर्ण बना रही है।
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