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एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में खुलासा
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खर्च, बैंक बैलेंस और घरेलू वित्तीय मजबूती में बड़ा सुधार
भुवनेश्वर। ओडिशा की महत्वाकांक्षी सुभद्रा डीबीटी योजना ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) रिसर्च के ताजा अध्ययन में सामने आया है कि योजना लागू होने के बाद महिलाओं की बचत, खर्च और बैंक बैलेंस में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। अध्ययन के अनुसार, सुभद्रा योजना से जुड़ी महिलाओं की बचत में 45 प्रतिशत और खर्च में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
छह महीनों में ही महिलाओं के बैंक खातों की स्थिति हुई मजबूत
सितंबर 2024 में शुरू की गई इस योजना ने छह महीनों के भीतर ही महिलाओं के बैंक खातों की स्थिति को मजबूत किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, योजना से पहले लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में औसत राशि 15,146 रुपये थी, जो योजना लागू होने के बाद बढ़कर 22,033 रुपये हो गई। इसी अवधि में निकासी राशि भी 6,937 रुपये से बढ़कर 8,857 रुपये पर पहुंच गई, जो बेहतर उपभोग क्षमता और घरेलू मजबूती को दर्शाती है।
1.6 लाख से अधिक पर आधारित विस्तृत अध्ययन
एसबीआई रिसर्च टीम ने 1.6 लाख से अधिक व्यक्तियों पर आधारित विस्तृत अध्ययन किया, जिसमें 75,750 लाभार्थी और 85,588 गैर-लाभार्थी शामिल थे। ‘डिफरेंस-इन-डिफरेंसेस’ पद्धति पर आधारित इस शोध में यह साफ हुआ कि सुभद्रा योजना ने न केवल महिलाओं की वित्तीय स्थिति में सुधार किया, बल्कि उनके परिवारों और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को भी मजबूत किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि योजना ने खासकर उन परिवारों की स्थिति सुधारी है जो पहले वित्तीय रूप से कमजोर थे।
महिलाओं की आर्थिक सहभागिता बढ़ी
देवी सुभद्रा के नाम पर आरंभ की गई यह योजना महिलाओं के खातों में प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण उपलब्ध कराती है, जिससे उन्हें घरेलू वित्तीय निर्णयों में अधिक स्वतंत्रता और भागीदारी मिली है। एसबीआई रिसर्च ने कहा कि सुभद्रा योजना ने महिलाओं की आर्थिक सहभागिता बढ़ाई है और उन्हें बचत और उपभोग क्षमता में आत्मनिर्भर बनाया है। यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरी है।
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