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भारतीय संस्कृति और सभ्यता की प्रेरणा है ‘मातृशक्ति’
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परिवार को संगठित रखने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ाती है आगे
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“राष्ट्रीय मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान” पर विशेष लेख
लेखक – डॉ. मुकेश महालिंग
(कैबिनेट मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, संसदीय कार्य तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, ओडिशा सरकार)
हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता की प्रेरणा ‘मातृशक्ति’ है। परिवार-आधारित हमारी संस्कृति में नारी ही परिवार की आधारशिला होती है। वह मां के रूप में केवल जन्मदात्री ही नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रथम गुरु भी होती है। कभी बहन के रूप में स्नेह और आनंद का स्रोत बनती है, तो कभी सहधर्मिणी के रूप में सुख-दुःख तथा सफलता-विफलता की साथी और मित्र बनकर सहयोग करती है। वह परिवार को संगठित रखने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाती है। उसकी गोद में पलकर ही एक समृद्ध समाज का निर्माण होता है। विकसित समाज के निर्माण में नारी के महत्वपूर्ण योगदान को हमारी सरकार ने भी समझा है। मातृत्व की सुरक्षा तथा भारतीय महिलाओं में दूसरे सबसे सामान्य कैंसर के रूप में पहचाने जाने वाले जानलेवा रोगों में से एक गर्भाशय ग्रीवा कैंसर को पूर्ण रूप से समाप्त करने के लिए देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में “राष्ट्रीय मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान” का शुभारंभ किया।
ओडिशा के परिप्रेक्ष्य में भी भुवनेश्वर स्थित कृषि भवन में आयोजित कार्यक्रम में माननीय लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसका शुभारंभ किया। इस अभियान के तहत राज्य की कुल 336,671 किशोरियों को टीकाकरण करने का व्यापक लक्ष्य रखा गया है।
संक्षेप में समझें तो गर्भाशय के निचले भाग को ग्रीवा (सर्विक्स) कहा जाता है और इसी हिस्से में कैंसर उत्पन्न होता है। मानव पैपिलोमा वायरस शरीर में लंबे समय तक रहने के कारण धीरे-धीरे कैंसर का रूप ले लेता है, लेकिन इसकी शुरुआत में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। इस कारण कई महिलाएं प्रारंभ में इसका पता नहीं लगा पातीं और अंतिम अवस्था में रोग का पता चलता है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता की कमी इस रोग को और अधिक गंभीर बना देती है। वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार लगभग 99.7% गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का मुख्य कारण मानव पैपिलोमा वायरस संक्रमण है। लेकिन इस घातक रोग के संक्रमण को रोकने के लिए हमारी सरकार प्रयासरत है। जिस टीके की कीमत बाजार में लगभग चार हजार रुपये होती है, उसे निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। यह टीका शरीर को एचपीवी के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है और भविष्य में कैंसर होने की संभावना को कम करता है। यह एक निवारक टीका है, इसलिए रोग होने से पहले ही सुरक्षा देता है। यह टीका 0.5 मिलीलीटर की मात्रा में बाएं हाथ के ऊपरी भाग की मांसपेशी में दिया जाता है। पहले इसे दो या तीन बार लेना पड़ता था, लेकिन अब उन्नत टीके के कारण केवल एक ही डोज पर्याप्त है, जिससे यह अधिक सरल और सुविधाजनक हो गया है।
जिन किशोरियों की आयु 14 वर्ष से अधिक लेकिन 15 वर्ष से कम है, उन्हें यह टीका दिया जाएगा। इस आयु में टीकाकरण का उद्देश्य संक्रमण से पहले ही शरीर को सुरक्षित करना है। तीन महीने की अवधि वाले इस कार्यक्रम में अब तक ओडिशा में 24,329 किशोरियों का टीकाकरण किया जा चुका है। कार्यक्रम के पहले महीने में जिला मुख्यालय अस्पताल, उपखंड अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में टीका लगाया जाएगा। अगले दो महीनों में इसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तारित किया जाएगा, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों के लोग भी लाभान्वित हो सकें। बाद में इसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। यह टीकाकरण प्रतिदिन (छुट्टी को छोड़कर) सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक चलेगा। टीका लेने से पहले पेट भरकर भोजन करना आवश्यक है। टीकाकरण केंद्र पर माता-पिता या अभिभावक के साथ जाना चाहिए। पात्रता सुनिश्चित करने के लिए आयु प्रमाण पत्र जैसे आधार कार्ड, स्कूल पहचान पत्र या जन्म प्रमाण पत्र लाना आवश्यक है। यदि कोई पहचान पत्र नहीं है, तो केंद्र पर उपलब्ध आयु घोषणा पत्र पर अभिभावक के हस्ताक्षर करने होंगे। पंजीकरण के लिए एक वैध मोबाइल नंबर आवश्यक होगा और ओटीपी के माध्यम से सहमति ली जाएगी। यदि नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, तो अभिभावक को लिखित सहमति देनी होगी।
इस अभियान को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए लाभार्थी स्वयं भी यू-विन पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। टीका लेने के बाद 30 मिनट तक केंद्र में निगरानी में रखा जाएगा। इसके बाद हल्का दर्द या मामूली बुखार होना सामान्य है, जो 2-3 दिनों में ठीक हो जाता है। इसके अलावा इस टीके का कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं है। मासिक धर्म के दौरान भी यह टीका लेना पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, यदि पहले किसी टीके से एलर्जी हुई हो, गर्भावस्था हो या गंभीर बीमारी (जैसे तीव्र एनीमिया, निमोनिया, तेज बुखार आदि) हो, तो यह टीका नहीं लेना चाहिए। यदि पहले ही एचपीवी टीका लिया जा चुका है, तो दोबारा लेने की आवश्यकता नहीं है। टीकों के सुरक्षित परिवहन और आपूर्ति के लिए कोल्ड चेन व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
नारी स्वस्थ होगी तभी सशक्त परिवार की परिकल्पना संभव है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस (16 सितंबर 2025) के अवसर पर “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” अभियान शुरू किया गया था। इसके तहत स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर महिलाओं की जांच और जागरूकता अभियान चला रहे हैं। इसमें 1 करोड़ से अधिक (107.78 लाख) महिलाओं ने भाग लिया। 1.02 लाख स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 25.38 लाख महिलाओं की हाइपरटेंशन और डायबिटीज, 9.64 लाख की कैंसर, 12.06 लाख की एनीमिया, 1.73 लाख की सिकल सेल और 7.98 लाख की टीबी जांच की गई। इस अभियान में 29,829 यूनिट रक्त संग्रह के साथ 12,451 निक्षय मित्र पंजीकृत किए गए।
इसके अलावा 311 करोड़ रुपये की लागत से “मुख्यमंत्री कैंसर उपचार अभियान” भी शुरू किया जा रहा है, जिसके तहत व्यापक जागरूकता, ग्रामीण स्तर पर स्क्रीनिंग, कैंसर जांच शिविर और उन्नत उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। कैंसर उपचार के लिए डिजिटल हब एंड स्पोक मॉडल भी लागू किया जाएगा। साथ ही, केंद्रीय बजट में 17 कैंसर दवाओं पर आयात शुल्क में छूट और जीएसटी में कमी (कुछ दवाओं को शून्य तथा कुछ को 12% से घटाकर 5%) दी गई है, जो कैंसर नियंत्रण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नारी शिक्षित होगी तो परिवार शिक्षित होगा, नारी सुरक्षित होगी तो समाज सुरक्षित होगा और नारी समृद्ध होगी तो भारत समृद्ध और विकसित बनेगा। इसी सोच के साथ मातृत्व की सुरक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए सरकार ने एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया है। यह केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि नारी और मातृत्व की सुरक्षा के प्रति हमारा संकल्प है। अतः सभी किशोरियों, अभिभावकों और परिवारों से अनुरोध है कि इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और इसे सफल बनाएं।
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