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8 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 18-20 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
भुवनेश्वर। ओडिशा का महत्त्वपूर्ण खनिज क्षेत्र अगले सात वर्षों में तीव्र विस्तार की ओर अग्रसर है। एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2025 में लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर का यह क्षेत्र वर्ष 2032 तक बढ़कर 18 से 20 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। यह आकलन नेट जीरो एनर्जी ट्रांजिशन एसोसिएशन द्वारा जारी किया गया।
यह अनुमान ग्लोबल क्लीनटेक एक्सपो-ओडिशा 2026 के दौरान सार्वजनिक किया गया, जिससे राज्य के खनन, प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षेत्र में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं।
नीतिगत पहल और निवेश से बढ़ेगी भागीदारी
वर्तमान में वर्ष 2025 में इस क्षेत्र की संरचना में 40 प्रतिशत खनन, 10 प्रतिशत प्रसंस्करण और 5 प्रतिशत विनिर्माण की हिस्सेदारी है। वर्ष 2032 तक इनके क्रमशः 50 प्रतिशत, 40 प्रतिशत और 30 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह परिवर्तन लक्षित नीतिगत उपायों और औद्योगिक निवेश के कारण संभव होगा।
भुवनेश्वर में दो दिवसीय आयोजन
यह दो दिवसीय आयोजन 20-21 फरवरी को भुवनेश्वर में आयोजित हुआ। राज्य के लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यम मंत्री गोकुलानंद मल्लिक ने इसका उद्घाटन किया।
आयोजन में स्वच्छ प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े 75 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिससे ओडिशा के स्वच्छ प्रौद्योगिकी निवेश केंद्र के रूप में उभरने का संकेत मिला।
30 से अधिक महत्त्वपूर्ण खनिज भंडार
संस्था के कार्यकारी निदेशक देवी प्रसाद दास ने कहा कि ओडिशा का महत्त्वपूर्ण खनिज और स्वच्छ प्रौद्योगिकी निवेश का प्रमुख केंद्र बनना राज्य की दूरदर्शी नीति और सहयोगी ढांचे का परिणाम है।
राज्य में 30 से अधिक महत्त्वपूर्ण खनिजों के भंडार उपलब्ध हैं, जिससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में इसकी केंद्रीय भूमिका सुनिश्चित होती है। नयागढ़ में लिथियम सहित ग्रेफाइट, वैनेडियम और कोबाल्ट जैसे खनिजों की हालिया खोजों ने संभावनाओं को और सुदृढ़ किया है। गंजाम में दुर्लभ मृदा गलियारा और महत्त्वपूर्ण खनिज खंडों की समर्पित नीलामी पंचांग जैसी पहलें ओडिशा को सौर ऊर्जा, बैटरी और विद्युत वाहन विनिर्माण के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होंगी।
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