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शास्त्रीय संगीत से फिल्मों तक छोड़ी अमिट छाप
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ओड़िया संगीत जगत को अपूरणीय क्षति
कटक। ओड़िया संगीत जगत की प्रख्यात पार्श्वगायिका और आकाशवाणी तथा दूरदर्शन की शीर्ष श्रेणी की कलाकार गीता पटनायक का 15 फरवरी 2026 को कटक के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 73 वर्ष की थीं। अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज से श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली गीता पटनायक ने कई कालजयी गीतों से विशेष पहचान बनाई थी। रविवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ दिनों से गंभीर रूप से अस्वस्थ थीं।
साहित्य उत्सव के दौरान बिगड़ी थी तबीयत
12 फरवरी को भुवनेश्वर में एक साहित्य उत्सव में अतिथि के रूप में शामिल होने के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। देर रात करीब एक बजे उन्हें पहले कैपिटल अस्पताल ले जाया गया। भारी ब्रेन स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क में अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, जिसके बाद उन्हें कटक के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। तब से वह आईसीयू में अचेत अवस्था में थीं।
चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। निधन के समय उनके पति अभियंता किशोर गोपाल बत्रा, देवर पूर्व पुलिस अधिकारी शारदा प्रसन्न पात्रा, भतीजे पराग पटनायक सहित परिवारजन उपस्थित थे।
संगीत साधना की समृद्ध परंपरा
राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर गीता पटनायक ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा गुरु क्षितीश चंद्र मैत्री से प्राप्त की। बाद में कटक स्थित कला विकास केंद्र में बालकृष्ण दास और गुरु रखाल चंद्र मोहंती के सान्निध्य में उन्होंने संगीत साधना को नई ऊंचाई दी। उन्होंने लगभग 15 ओड़िया फिल्मों में पार्श्वगायन किया और प्रमुख पार्श्वगायिका के रूप में ख्याति अर्जित की। ओड़िया सिनेमा में योगदान के लिए उन्हें राज्य सरकार के सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका सम्मान से नवाजा गया।
संगीत और संस्कृति जगत में शोक की लहर
उनके निधन से ओडिशा के संगीत और सांस्कृतिक परिदृश्य में गहरा शून्य उत्पन्न हो गया है। कई गणमान्य व्यक्तियों, कलाकारों और प्रशंसकों ने उनकी स्मृति को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।
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