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देश का एकलौता लोक भवन बना
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सी शेखर रेड्डी ने राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपाटी को सौंपा प्रमाणपत्र, 88 अंक के साथ देश के उत्कृष्ट हरित परिसरों में शामिल हुआ लोक भवन
भुवनेश्वर। ओडिशा के लोक भवन को भारतीय हरित भवन परिषद (आईजीबीसी) की ओर से प्रतिष्ठित प्लेटिनम ग्रीन कैंपस प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है। आईजीबीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सी. शेखर रेड्डी ने लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान यह प्रमाणपत्र ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपाटी को सौंपा।
आईजीबीसी ग्रीन कैंपस रेटिंग प्रणाली के तहत लोक भवन ने 100 में 88 अंक हासिल किए हैं और प्लेटिनम श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि लोक भवन को देश के उच्च रेटिंग वाले हरित परिसरों में शामिल करती है। साथ ही, जुलाई 2024 में शुरू की गई संशोधित और अधिक कठोर आईजीबीसी ग्रीन कैंपस संस्करण-1 रेटिंग प्रणाली के तहत लोक भवन को प्लेटिनम रेटिंग हासिल करने वाला पहला परिसर बताया गया है।
लोक भवन में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को परिसर की योजना, आधारभूत संरचना और दैनिक संचालन का हिस्सा बनाया गया है। परिसर के 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में हरित आवरण है। यहां 2,374 पेड़ और 72 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। जैव विविधता के वैज्ञानिक आकलन में परिसर में 27 जीव-जंतु प्रजातियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई है। व्यापक वृक्षावरण और परावर्तक छतों के माध्यम से परिसर में गर्मी के प्रभाव को कम करने के प्रयास किए गए हैं।
जल संरक्षण पर विशेष जोर
लोक भवन में जल संरक्षण के लिए जल-कुशल उपकरणों के इस्तेमाल से पेयजल की खपत में 35 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। परिसर में वर्षा जल संचयन की व्यापक व्यवस्था की गई है, जिसमें रिचार्ज ट्रेंच, तालाब, फिल्टर चैंबर और गहरे बोरवेल रिचार्ज तंत्र शामिल हैं। देशी और कम पानी में विकसित होने वाले पौधों के इस्तेमाल से सिंचाई की जरूरत भी कम की गई है।
635 किलोवाट सौर ऊर्जा क्षमता
ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में लोक भवन का ऊर्जा प्रदर्शन सूचकांक 50.57 किलोवाट घंटा प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष है। परिसर में छतों और जमीन पर स्थापित स्थानों पर कुल 635 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया गया है। ऊर्जा दक्ष एलईडी प्रकाश व्यवस्था और समय आधारित स्मार्ट नियंत्रण के माध्यम से बिजली की खपत कम करने के उपाय किए गए हैं।
विद्युत वाहनों को बढ़ावा
लोक भवन परिसर में स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए छायादार पैदल मार्ग और आंतरिक आवागमन के लिए विद्युत वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। परिसर में विद्युत वाहनों के लिए चार्जिंग ढांचा भी विकसित किया गया है, जिससे शून्य-उत्सर्जन परिवहन को प्रोत्साहन मिल रहा है।
कचरा प्रबंधन में भी उल्लेखनीय पहल
लोक भवन में गीले, सूखे, सैनिटरी और खतरनाक कचरे का स्रोत स्तर पर अलग-अलग संग्रह किया जाता है। जैविक कचरे का परिसर में ही वर्मी कम्पोस्टिंग के माध्यम से उपचार कर उसे बागवानी, रसोई उद्यान और औषधीय उद्यानों में दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। अलग किए गए सूखे कचरे को अधिकृत पुनर्चक्रण व्यवस्था के माध्यम से भेजा जाता है, जिससे इसे पूरी तरह कचरा भराव क्षेत्र में जाने से रोका जा रहा है।
स्वास्थ्य और सुगम पहुंच की सुविधाएं
लोक भवन को धूम्रपान निषेध क्षेत्र घोषित किया गया है। परिसर में ताजी हवा के बेहतर प्रवाह और अंदरूनी वायु गुणवत्ता को बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए रैंप, सुगम शौचालय, ब्रेल सुविधा वाले लिफ्ट, आरक्षित पार्किंग तथा सुगम पैदल मार्ग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
आईजीबीसी प्लेटिनम प्रमाणन को लोक भवन में सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और हरित प्रशासनिक ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह पहल सार्वजनिक संस्थानों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी और जलवायु के प्रति संवेदनशील विकास का एक उदाहरण प्रस्तुत करती है।
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