भुवनेश्वर, ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपटी ने कॉरपोरेट जगत से अपील की है कि वे कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर ) को केवल कानूनी दायित्व तक सीमित न रखते हुए इसे ओडिशा के समग्र विकास में जिम्मेदार भागीदारी के अवसर के रूप में देखें।
भुवनेश्वर में आयोजित ब्रिज भारत कॉन्क्लेव 2026 एवं राष्ट्रीय सेमिनार ‘कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी: उभरते मुद्दे एवं चुनौतियां’ को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सीएसआर अब केवल परोपकारी गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों, समुदायों और पर्यावरण के प्रति व्यापक जिम्मेदारी बन चुका है।
कार्यक्रम का आयोजन ओडिशा कॉरपोरेट फाउंडेशन और फ्रीडम एजु ने, ओडिशा सरकार के सार्वजनिक उपक्रम विभाग के सहयोग से किया।
राज्यपाल ने कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत भारत के सीएसआर ढांचे ने सामाजिक विकास में कॉरपोरेट भागीदारी के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार की है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि “सीएसआर का लक्ष्य केवल अनुपालन नहीं होना चाहिए” और कॉरपोरेट संस्थानों को ‘खर्च करो और रिपोर्ट करो’ की सोच से आगे बढ़कर रणनीतिक, सहभागी और परिणाम-केंद्रित मॉडल अपनाना चाहिए। उन्होंने सीएसआर परियोजनाओं के प्रभाव का आकलन, विश्वसनीय क्रियान्वयन और समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
डॉ. कंभमपटी ने कहा कि स्टील, बिजली, खनन और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में तेजी से हो रहा औद्योगिकीकरण पर्यावरणीय जिम्मेदारी, जलवायु अनुकूलन और सामुदायिक कल्याण के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने सीएसआर के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, पोषण, आजीविका, कौशल विकास, खेल, ग्रामीण विकास और आपदा तैयारी को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
शिक्षा को महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए उन्होंने बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्ति और मेंटरशिप में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई, विशेषकर आदिवासी एवं पिछड़े जिलों में पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों के लिए।
राज्यपाल ने खनन एवं बड़े औद्योगिक परियोजना क्षेत्रों में वन एवं जैव विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा, आजीविका बहाली, स्थानीय रोजगार और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने में कॉरपोरेट सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। चक्रवात सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के प्रति ओडिशा की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने आपदा जोखिम न्यूनीकरण और तैयारी पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि समुदायों को सीएसआर परियोजनाओं का केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उनके निर्माण और संचालन में सक्रिय भागीदार बनाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में कंधमाल के सांसद सुकांत कुमार पाणिग्रही, जाजपुर के सांसद डॉ. रवींद्र नारायण बेहरा, सार्वजनिक उपक्रम विभाग के आयुक्त-सह-सचिव एमडी सादिक आलम और इरेडा के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विजय कुमार महंती ने भी विचार रखे।
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