भुवनेश्वर: ओडिशा के उत्तरी हिस्सों में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। राज्य के चार जिलों की करीब 45 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) राजेश प्रभाकर पाटिल ने शुक्रवार को बताया कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।
एसआरसी के अनुसार, जाजपुर, भद्रक, बालेश्वर और मयूरभंज जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। बैतरणी और बुढाबलंग समेत कई प्रमुख नदियों में जलस्तर बढ़ने से इन जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।
बैतरणी नदी में जलस्तर बढ़ने से भद्रक और जाजपुर के कई इलाके प्रभावित हुए हैं। पहले से मौजूद तटबंधों में हुए कटाव और दरारों के रास्ते बाढ़ का पानी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचा है। वहीं, बुढाबलं नदी का पानी बारीपदा शहर के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
सुवर्णरेखा नदी में बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ प्रभावित इलाकों से करीब 3,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। चारों प्रभावित जिलों की 45 पंचायतों में राहत केंद्र खोले गए हैं, जहां विस्थापित लोगों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
राहत और बचाव अभियान को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओड्राफ) की 10 टीमें और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की सात टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की हैं।
एसआरसी राजेश प्रभाकर पाटिल ने कहा कि जलका, सालंदी, बैतरणी, बुढाबलंग और सुवर्णरेखा नदियों में जलस्तर बढ़ा है। इसके कारण जाजपुर, बालेश्वर, भद्रक और मयूरभंज के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार शाम तक सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर और बढ़ने की संभावना है।
एसआरसी ने बताया कि स्थिति की निगरानी और राहत-बचाव कार्यों के समन्वय के लिए सभी प्रभावित जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया है। जिला प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन द्वारा नदियों के जलस्तर, तटबंधों और निचले इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है। राहत केंद्रों में पहुंचाए गए लोगों को भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट पर है और स्थिति के अनुसार अतिरिक्त राहत एवं बचाव संसाधनों की तैनाती की तैयारी की जा रही है।
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