भुवनेश्वर: भुवनेश्वर-कटक कमिश्नरेट पुलिस ने ‘साइबर रक्षक’ पहल के तहत साइबर स्टॉकिंग के खिलाफ जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। पुलिस ने लोगों से साइबर स्टॉकिंग को गंभीर और दंडनीय अपराध के रूप में समझने तथा ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल इसकी शिकायत करने की अपील की है।
अभियान के तहत पुलिस ने नागरिकों को ऑनलाइन उत्पीड़न और साइबर स्टॉकिंग के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस ने टोल-फ्री साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in की जानकारी साझा की है।
कमिश्नरेट पुलिस की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी निजता और व्यक्तिगत दायरे में दखल देना साइबर स्टॉकिंग की श्रेणी में आ सकता है। इस तरह का व्यवहार पीड़ित में डर, चिंता, मानसिक उत्पीड़न और भावनात्मक परेशानी पैदा कर सकता है।
पुलिस ने नागरिकों से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का जिम्मेदारीपूर्वक इस्तेमाल करने और दूसरों की निजता तथा व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करने की अपील की है। साइबर स्टॉकिंग का सामना करने वाले लोगों से ऐसी घटनाओं को सहन या नजरअंदाज न करने और समय पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है।
पुलिस ने साइबर अपराधों से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों के बारे में भी लोगों को जागरूक किया है। एडवाइजरी के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66E के तहत निजता के उल्लंघन के मामले में तीन साल तक की सजा, दो लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
इसी तरह, आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत अश्लील सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण पर पहली बार दोषसिद्धि की स्थिति में तीन साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। दोबारा अपराध करने पर पांच साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
पुलिस ने यह भी बताया कि यौन रूप से स्पष्ट सामग्री तथा बच्चों से संबंधित यौन शोषण सामग्री से जुड़े गंभीर अपराधों में लागू कानूनी प्रावधानों के तहत सात साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
कमिश्नरेट पुलिस ने नागरिकों से सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने तथा ऑनलाइन उत्पीड़न को बढ़ावा देने या उसमें शामिल होने से बचने की अपील की है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि साइबर स्टॉकिंग को किसी भी स्थिति में ध्यान आकर्षित करने या स्नेह जताने का माध्यम नहीं माना जाना चाहिए। यह एक गंभीर व्यवहार है और ऐसी घटनाओं की उचित माध्यम से शिकायत की जानी चाहिए।
साइबर स्टॉकिंग या अन्य साइबर अपराध का सामना करने वाले नागरिक 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अभियान का उद्देश्य सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देना और साइबर अपराधों की समय पर रिपोर्टिंग के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
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