Home / Odisha / सुकिंदा में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के एनजीटी के निर्देश

सुकिंदा में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के एनजीटी के निर्देश

  •     भूजल प्रदूषण की कड़ी निगरानी

  •     दूषित हैंडपंप बंद करने और नियमित जल जांच का आदेश

  •     भूजल प्रदूषण पर सामाजिक कार्यकर्ता की याचिका पर सुनवाई

भुवनेश्वर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने ओडिशा सरकार और संबंधित नियामक एजेंसियों को जाजपुर जिले के खनिज समृद्ध सुकिंदा क्षेत्र में भूजल प्रदूषण की निगरानी मजबूत करने तथा लोगों को निर्बाध रूप से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ ने इस संबंध में कई महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए मामले का निस्तारण किया।

न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की पीठ ने जाजपुर के सामाजिक कार्यकर्ता मंटू दास द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि क्रोमाइट खनन सहित औद्योगिक गतिविधियों के कारण क्षेत्र का भूजल गंभीर रूप से प्रदूषित हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

एनजीटी द्वारा गठित संयुक्त समिति ने भी अपनी जांच में पाया कि भूजल में प्रदूषकों के फैलाव की गहन जांच की आवश्यकता है।

37 नमूनों में मानक से अधिक मिला हेक्सावैलेंट क्रोमियम

सुनवाई के दौरान केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए एनजीटी ने कहा कि प्री-मानसून अवधि में 37 भूजल नमूनों तथा मानसून के बाद 28 नमूनों में हेक्सावैलेंट क्रोमियम की मात्रा निर्धारित सीमा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक पाई गई।

हालांकि, रिपोर्ट में प्रदूषण के कारणों की स्पष्ट पहचान नहीं की गई और जाजपुर जिला प्रशासन ने भी इस संबंध में उठाए गए सुधारात्मक कदमों का पर्याप्त विवरण प्रस्तुत नहीं किया।

22 दूषित हैंडपंप किए गए बंद

एनजीटी ने जाजपुर जिला कलेक्टर द्वारा दायर हलफनामे का उल्लेख करते हुए कहा कि सुकिंदा ब्लॉक में मेगा पाइप पेयजल परियोजना पूरी तरह संचालित है और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के अनुरूप सुरक्षित पेयजल घर-घर नल कनेक्शन के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है।

अधिकरण ने यह भी दर्ज किया कि क्षेत्र के 22 दूषित हैंडपंपों को दिसंबर 2025 में स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

एनजीटी के महत्वपूर्ण निर्देश

अधिकरण ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव, जाजपुर जिला कलेक्टर और ग्रामीण जलापूर्ति एवं स्वच्छता (आरडब्ल्यूएसएस) विभाग को निर्देश दिए कि सुरक्षित पेयजल योजनाओं का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया जाए। पेयजल की नियमित गुणवत्ता जांच सुनिश्चित की जाए। दूषित कुओं और हैंडपंपों की पहचान कर उन्हें बंद किया जाए या उनका उपचार किया जाए। प्रभावित गांवों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक जल शोधन संयंत्र स्थापित किए जाएं। क्रोमाइट खनन उद्योगों के अपशिष्ट शोधन संयंत्रों (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट सिस्टम) का नियमित निरीक्षण किया जाए।

जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर जोर

एनजीटी ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक गतिविधियों के बीच स्थानीय लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अधिकरण ने संबंधित विभागों को भूजल प्रदूषण की नियमित निगरानी और प्रभावी सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की बेहतर सुरक्षा की जा सके।

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